राजस्थान में कड़कड़ाती ठण्ड ने सभी को पस्त कर रखा है। उदयपुर में जहाँ खुशनुमा सर्दी रहती है इस बार यहाँ भी 3.5 डिग्री तापमान रिकोर्ड किया गया। माउण्ट आबू जो राजस्थान का एकमात्र हिल-स्टेशन हैं वहाँ तो तापमान माइनस 6 डिग्री तक चले गया। सभी की इंतजार में है धूप। धूप निकले और बाहर बैठकर धूप का सेवन किया जाए। कम्प्यूटर पर की-बोर्ड चलाते हुए भी अंगुलियां ठण्डी पड़ जाती हैं और उन्हें बार-बार विश्राम देकर गर्म किया जाता है। ऐसे में एक कविता निकल आयी। हल्की-फुल्की सी, महज सर्दी को ध्यान में रखकर लिखी गयी कविता।
धूप कब निकल रही?
बर्फीली ठण्ड थी
हवा भी प्रचण्ड थी
थर-थर सी हो रही
धूप कब निकल रही?
पात ओस लिप्त थे
धुंध भरा व्योम था
सूरज को तक रही
धूप कब निकल रही?
चिड़िया भी मौन थी
सड़क तक उदास थी
बदली को कह रही
धूप कब निकल रही?
खेत में किसान था
हाथ में कुदाल था
आज भोर कह रही
धूप कब निकल रही?
छत पर मजदूर था
हाथ में तगार था
साँस भाप बन रही
धूप कब निकल रही?