Thursday, April 4, 2019

भेड़िये ने खाल उतार दी है

कल कांग्रेस का घोषणा पत्र घोषित हुआ, बहुत आलोचना हो रही है लेकिन मुझे नया कुछ नहीं लग रहा है। कांग्रेस की राजनीति स्पष्ट है, उनके समर्थक भी भलीभांति समझते हैं इसलिये ही दृढ़ता के साथ उनके पीछे खड़े रहते हैं। राजनीति का अर्थ होता है राज करने की नीति। एक राजनीति होती है – जनता को सुखी और सुरक्षित करने की और दूसरी होती है – स्वयं को सुखी और सुरक्षित करने की। पहली राजनीति लोकतांत्रिक होती है तो दूसरी राजाशाही की ओर इंगित करती है। कांग्रेस की राजनीति दूसरे प्रकार की रही है, स्वयं को सुखी और सुरक्षित करने की। लोकतंत्र में यदि आप राजाशाही घुसाना चाहोंगे तब आपको अपने लिये ऐसे लोगों की आवश्यकता हमेशा रहती है जो शक्तिशाली हों। गुण्डे, मवाली, अराजक तत्व आपके चहेते होने ही चाहिये जिससे आप किसी भी क्रान्ति को कुचल सकें। जैसे आपातकाल में किया गया था या फिर सिखों का नरसंहार कर किया गया था। भारत में लोकतंत्र है और लोकतंत्र में चुनाव होते हैं। अन्दर कैसा भी राजाशाही भेड़िया बैठा हो लेकिन लोकतंत्र में खाल तो भेड़ की ही पहननी पड़ती है। 2019 के चुनाव विस्मयकारी हैं, इस बार भेड़िये ने भेड़ की खाल नहीं पहनी, अपितु स्पष्ट ऐलान किया कि हम भेड़िये हैं और हम केवल स्वयं के लिये राज करना चाहते हैं। इससे पूर्व भी वे संकेत दे चुके थे जब देश के प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं देश का चौकीदार हूँ तब काग्रेंस ने कहा था कि ये देश को चौकीदार देना चाहते हैं जबकि हम प्रधानमंत्री देना चाहते हैं। मतलब उनकी राजनीति स्पष्ट थी।
पूर्व के चुनावों में राहुल गाँधी कभी जनेऊ पहन रहे थे, कभी यज्ञ कर रहे थे लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं किया। बस सीधे केरल गये और वहाँ से उम्मीदवारी की घोषणा कर दी। अपनी पुरानी खाल को उतार फेंका। अपने समर्थकों को स्पष्ट ऐलान कर दिया कि हम राज करने आए हैं और राज करने में तुम्हारा भी हिस्सा होगा। इसलिये यदि तुम देश के टुकड़े करना चाहोगे तो तुम पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं होगी, यदि तुम देश के एक वर्ग को लूटना चाहोगे तो हमारी स्वीकृति होगी। वे सारे अधिकार दिये जाएंगे जो कभी लुटेरे शासक अपनी सेना को देते आए थे। जैसे ही कांग्रेस ने घोषणा पत्र जारी किया, अराजक तत्व और जिनकी मानसिकता सामान्य जनता पर राज करने की रहती है, वे सारे ही खुशी का इजहार करने लगे। उन्होंने भी अपने चोगे उतार डाले। चारों तरफ एक ही शोर मचा है कि राजा हम तुम्हारे साथ हैं, तुम्हें हम सुखी और सुरक्षित रखेंगे और तुम हमें रखना। यह गरीब जनता हमारी सेवा के लिये है, इसलिये राज करना आपका पुश्तैनी अधिकार है और साथ देना हमारा। पड़ोसी देशों को भी कहा गया कि आपको भी इच्छित प्रदेश मिल जाएगा बस हमारा साथ दो। इतना कहर मचा दो कि देश का प्रधानमंत्री का ध्यान चुनाव से हटकर देश की सुरक्षा की ओर लग जाए। सारे पहलवान अखाड़े में आ जुटे हैं, अपनी ताकत से जनता को गुलाम बनाने निकल पड़े हैं। ये कल तक भी यही कर रहे थे, बस कल तक इनके चेहरे पर लोकतंत्र का नकाब था लेकिन आज यह स्पष्ट घोषणा के साथ अखाड़े में उतर आए हैं। सारे देश के अराजक तत्व एकत्र हो जाओ। तुम हमें राजा बनाओ हम तुम्हें लूटने का अधिकार देंगे। सारा धन, सारा वैभव राजमहल में सीमित करने की घोषणा है। जिसने भी कल तक अपराध किये थे, वे सभी राजाशाही का हिस्सा होंगे, उनपर कोई कानून नहीं लागू होगा। सभी बुद्धिजीवी, कलाकार आदि को खुला निमंत्रण मिल गया है कि तुम हमारे चारण-भाट और हम तुम्हारें रक्षक बन जाएंगे। बस इस अफरा-तफरी के माहौल में कौन टुकड़ों पर मोहताज होना चाहेगा और कौन सर ऊँचा करके जीवन यापन करना चाहेगा, फैसला जनता को करना है। 

4 comments:

roopchandrashastri said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (05-04-2019) को "दिल पर रखकर पत्थर" (चर्चा अंक-3296) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 04/04/2019 की बुलेटिन, " चल यार धक्का मार , बंद है मोटर कार - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

अजित गुप्ता का कोना said...

शास्त्री जी आभार।

अजित गुप्ता का कोना said...

शिवम् मिश्रा जी आभार।