Saturday, September 15, 2018

कहीं दीप जलेंगे – कही दिल


साँप-छछून्दर की दशा, मुहावरा तो आपने सुना ही होगा। एक साँप ने छछून्दर पकड़ लिया, अब यदि साँप छछून्दर को निगल लेता है तो वह अंधा हो जाता है और उगलना उसके वश में नहीं। मैंने इस मुहावरे का उल्लेख क्यों किया है, यह बताती हूँ। परसो मोदी जी अपने कार्यकर्ताओं से बात कर रहे थे। एक महिला कार्यकर्ता ने पूछा कि 17 सितम्बर को आपका जन्मदिन है, इसे हम कैसे मनाएं? मोदी जी ने कहा कि जब मैं मुख्यमंत्री बना था, उससे पहले तक मुझे मेरे जन्मदिन का पता भी नहीं था, फिर लोगों ने मनाना शुरू किया, अब चूंकि मैं बड़े पद पर हूँ तो सभी यह प्रश्न करते हैं। मैं एक काम करने को कहता हूँ, क्या आप करेंगे? आप 17 तारीख को आपके गाँव में जो भी बच्चा पैदा हो रहा है, उसके पास जाएं, उसो आशीर्वाद दें और बताएं कि यदि आप परिश्रम करेंगे तो आप भी मोदी जैसे बड़े व्यक्ति बन सकते हैं। दिखने में बहुत ही सुन्दर और स्वस्थ विचार है। किसी भी नवजात के कान में यह मंत्र फूंकना की तुम महान हो क्योंकि आज के दिन तुमने जन्म लिया है, और तुम्हारी भी मोदी जैसे बड़े  बनने की सम्भावना है। मेरे  बेटे का जन्म 14 मार्च 1979 को हुआ और 100 साल पहले उसी दिन आइन्सटीन का जन्म हुआ था। हम सब इस गौरव से भरे रहते हैं कि जन्म तारीख एक है। तो 17 सितम्बर को जन्में बच्चों में यह गौरव नहीं होगा! जरूर होगा और वे गाहे-बगाहे इसका जिक्र भी करेंगे। लेकिन यदि बच्चे का परिवार कांग्रेसी हुआ तो! मोदी जी ने अपने कार्यकर्ताओं को मंत्र दे दिया है, वे घर-घर में जाएंगे भी। अब देखिए – एक घर में बच्चा पैदा हुआ है, लोग खुशियों में डूबे हैं, तभी बीजेपी के लोग मिठाई लेकर पहुंचते हैं। परिवारजन खुश होते हैं, पिता के मुँह में मिठाई का निवाला अभी गया भी नहीं था कि एक कार्यकर्ता कहता है कि भाग्यशाली है आपकी संतान जो मोदी जी के जन्मदिन पर जन्म लिया है, आगे जाकर यह भी मोदीजी जैसा बने, प्रभु से यही प्रार्थना है। बच्चे के कान में भी यही मंत्र फूंक दिया है। मिठाई का निवाला साँप की तरह गले में अटक गया। मिठाई ना हो गयी, छछूंदर हो गया। खाएंगे तो संतान के मोदी बनने की खुशी मनाएंगे और फिर पार्टी क्या हाल करेगी, उन्हें साफ दिखायी दे रहा है! नहीं खाते तो संतान की खुशी नहीं, मुँह में गया टुकड़ा उगले भी तो कैसे?
अब संतान ना हो गयी, सारी जिन्दगी का क्लेश हो गया! सोते-जागते यही चिन्ता, कहीं मोदी के प्रभाव में ना आ जाए। स्कूल जाएगा और तारीख जब अन्य बच्चे देखेंगे और यदि किसी ने कह दिया कि अरे तेरा जन्मदिन तो बड़े पवित्र दिन हुआ है तो? मोदीजी का छोटा सा फूल का उपहार भी घाव कर देगा! उन्होंने तो सहजता से कह दिया कि मेरा पीछा छोड़ो और नये बच्चों का जन्मदिन मनाओ लेकिन यहाँ तो कठिनाई खड़ी होने वाली है। न जाने संजय निरूपम जैसे कितने ही कंस, कहाँ हैं कृष्ण- कहाँ है कृष्ण, कहकर इस दिन जन्में बच्चों का वध करने नहीं निकल पड़े। मुझे तो 17 तारीख का इंतजार है, भाजपा के कार्यकर्ताओं का इंतजार है, जब वे घर-घर जाकर बच्चों को आशीर्वाद देंगे। कुछ परिवारजन फूलकर कुप्पा हो जाएंगे और कुछ की स्थिति साँप-छछून्दर जैसी होने वाली है। कुछ ने तो आज ही चिकित्सकों से सलाह लेना शुरू कर दिया होगा कि कुछ भी करो लेकिन इस 17 तारीख को टालो। कुछ ऐसे भी होंगे जो कहेंगे कि डॉक्टर, चाहे सिजेरियन कर दो, लेकिन तारीख 17 ही होनी चाहिये। कहीं दीप जलेंगे और कहीं दिल। देखते रहिये 17 को क्या होता है?
www.sahityakar.com

4 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (16-09-2018) को "हिन्दी की बिन्दी" (चर्चा अंक-3096) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Jyoti Dehliwal said...

बहुत ही बढ़िया, दी।

smt. Ajit Gupta said...

शास्त्रीजी आभार।

smt. Ajit Gupta said...

ज्योतिजी आभार।