Sunday, August 16, 2015

छैनी-हथौड़ी और कागज-कलम ही हैं इतिहास की संजीवनी

गाँव-गाँव में पुरातन गाथायें कहीं भजनों में तो कहीं गीतों में संचित हैं। कहीं प्रस्‍तरों में आलेख उत्‍कीर्ण हैं, तो कहीं भित्ती चित्रों के माध्‍यम से हमारी सभ्‍यता और संस्‍कृति को दर्शाया गया है। लाखों राजाओं की गौरव-गाथा आपको गीतों के माध्‍यम से सुनने को मिल जाएंगी, आज ये ही गाथायें हमारा इतिहास बन गयी हैं। इस पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%9B%E0%A5%88%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A4%A5%E0%A5%8C%E0%A5%9C%E0%A5%80-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%B9/

Wednesday, July 22, 2015

जीवन के अन्‍तरालों को खोजने की चाहत

हम रोज अपने अन्‍दर कुछ न कुछ तलाशते हैं, हम कौन हैं, हमें क्‍या अच्‍छा लगता है, हमें क्‍या करना चाहिए। रोज अपनी आदतों को खोजते हैं, रोज अपनी चाहतों को खोजते हैं और रोज अपने पाने को खोजते हैं। अपने आपके अलावा हम इंसानों को भी खोजते हैं, कौन अपना सा है? कौन है जिससे घण्‍टों बाते की जा सकती हैं? कौन है वह जिससे मन की बात की जा सकती है? 
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Tuesday, July 7, 2015

2 जी के जीवन को 4 जी के युग में चलाने की मुहीम

लोग कहते हैं जीवो, हमारा मन भी कहता है कि जिन्‍दगी ना मिलेगी दोबारा। लेकिन दुनिया कदम कदम पर आपको बता देती है कि आपका उपयोग समाप्‍त हो गया है, अब देख लीजिए आपको जीकर क्‍या करना है? किसी पेकेट पर लिखे एक्‍सपायरी डेट के समान हमारा जीवन भी हो गया है। डेट निकलने के बाद आप उपयोगी हो सकते हैं, आप पूरी तरह से खारिज नहीं हुए हैं लेकिन दुनिया कहती है कि हम तो खारिज करते हैं। आलेख को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - http://sahityakar.com/wordpress/2-%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%8B-4-%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%97-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82/ 

Wednesday, June 17, 2015

लोहे के पेड़ हरे होंगे, तू गीत प्रेम के गाता चल

मुझे लगता है जब आप एक स्‍थान पर हैं और वहाँ से आप अपने ध्‍येय की पूर्ति करने में सक्षम नहीं हो पाते तब उस स्‍थान को जितनी जल्‍दी हो छोड़ ही देना चाहिए। जिन्‍दगी ना मिलेगी दोबारा। पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A5%9C-%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%A4%E0%A5%82-%E0%A4%97%E0%A5%80/

Monday, June 15, 2015

यह दो मिनट का लेखन और पठन धीमा जहर ही है

मुझे लग रहा है कि फेसबुक से दूर हो जाना चाहिए। या फिर उन लोगों से तो अवश्‍य ही दूरी बना लेनी चाहिए जो असभ्‍य और अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। ब्‍लाग लेखन में इतनी अमर्यादा नहीं है, यहाँ कुछ भाषा के प्रति सभ्‍यता शेष है। पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%AF%E0%A4%B9-%E0%A4%A6%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%9F-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%96%E0%A4%A8-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AA%E0%A4%A0%E0%A4%A8-%E0%A4%A7%E0%A5%80/ 

Friday, May 15, 2015

सुन्‍दरता तू दुखी क्‍यूं है?

सुन्‍दरता के ही सपने होते हैं। न जाने सुन्‍दरता में ऐसी क्‍या बात है जो सपने देखने लगती है और जो सुन्‍दर नहीं है वे तो सपने भी नहीं देखते। उन्‍हें लगता है कि जो भगवान प्रसाद स्‍वरूप दे देगा वही श्रेष्‍ठ होगा। पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%A4%E0%A5%82-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%82/

Saturday, April 18, 2015

स्‍लेट जब रिक्‍त हो जाए तब अपनापन ही रिक्‍तता को भरता है

हमारे पास अधिकार के कुछ नम्‍बर होते हैं, रात 2 बजे भी उन्‍हीं नम्‍बरों पर हम डायल करके उनकी बाँहों को आमन्त्रित कर लेते हैं। वे भी तुरन्‍त ही बिना विलम्‍ब किए आ जाते हैं और आश्‍वस्‍त कर देते हैं कि हम अकेले नहीं है। 
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