मन मन की संतुष्टि के लिए अभिव्यक्ति आवश्यक है। समाज में सौहार्द के लिए मन की संतुष्टि आवश्यक है। अभी भी देर नहीं हुई है, बस टटोलिए अपने मन को और उसे अभिव्यक्त करने के अवसर तलाशिए। अभिव्यक्ति में ही परम शान्ति है।http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B5%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A5%8D/
श्रीमती अजित गुप्ता प्रकाशित पुस्तकें - शब्द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्ध संग्रह) सैलाबी तटबन्ध (उपन्यास), अरण्य में सूरज (उपन्यास) हम गुलेलची (व्यंग्य संग्रह), बौर तो आए (निबन्ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्मरणात्मक यात्रा वृतान्त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।
Wednesday, August 28, 2013
Tuesday, August 20, 2013
प्रेम का अभाव और असभ्यता का उदय
प्रेम का अभाव और असभ्यता का उदय
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Wednesday, August 7, 2013
मृत्यु का सैलाब और अपनों के हाथ में तराजू
भाई नहीं रहा ! यह सूचना है या फिर काल जलधि की हलचल।
मन के अनन्त में एक लहर सी उठती है, एक शून्य बन जाता है। मन का एक कोना टूटकर
बिखर जाता है। मन हाहाकार कर उठता है। टूटे हुए कोने को जोड़ने में लग जाता है मन।
अपने सगे सम्बन्धियों की बाहों में लिपटकर बह जाना चाहता है पीड़ा का सैलाब और भर
लेना चाहता है कुछ बूंद प्रेम-रस की।
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Wednesday, July 31, 2013
कलाकार और सम्मान
यदि आज ये कलाकार
नहीं होते तो हमारा जीवन कैसा होता? हम प्रकृति के समक्ष खड़े होते, निहत्थे बनकर।
लेकिन मनुष्य ने प्रकृति को संवार दिया, उसे सुसंस्कारित कर दिया। आज सृष्टि का
जो स्वरूप हमें दिखायी देता है, वह स्वरूप इन कलाकरों के कारण ही है। इनके लिए
जितने भी शब्द लिखे जाएं, वे कम हैं।
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Friday, July 26, 2013
एसी कोच और सफेद चादरें
ठण्डी सफेद चादरों पे सोये देर तक
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Friday, July 19, 2013
स्वाभिमानी वियतनाम के दर्शन
स्वाभिमानी वियतनाम के दर्शन
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Sunday, July 14, 2013
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