मेरे अंदर एक पूरा संसार है।
बचपन है, जवानी है और मेरा भविष्य है।
मेरे अंदर मेरे माता-पिता है, भाई-बहन
हैं, मेरे बच्चे हैं, पति है और मेरे मित्र हैं।
बचपन का सितौलिया है, गिल्ली-डंडा है,
पहल-दूज है, छिपा-छिपायी हा
कंचे हैं, गिट्टे हैं, रस्सीकूद है।
ताश है, चौपड़ है, केरम है, शतरंज है,
चंगा-पौ है।
क्रिकेट भी है, रिंग भी है, बेडमिंटन
भी है, टेबल-टेनिस भी है।
लड़ना-झगड़ना भी है, रूठना-मनाना भी
है, पिटना और रोना भी है।
गाना है, बजाना है, नाचना है, कूदना
है, फांदना है।
सभी कुछ तो है मेरे अंदर।
मेरे अंदर मेरा पूरा परिवार है, मेरा
आनन्द है, मेरी हँसी है, मेरा रुदन है।
किसको ढूंढ रही हूँ मैं? किसके साथ की
तलाश है?
जीने के लिये इतना क्या कम होती है?
अपने अंदर जिन्हें छिपा लिया था,
उन्हें बाहर तो निकालो
सारे ही साथी तुम्हें पाकर झूम उठेंगे,
नाचने लगेंगे।
तुम्हें दुनिया में किसी की तलाश नहीं
रहेगी
बस तुम और तुम्हारा मन पूर्ण है जीवन
के लिये
बस इसे एक बार पुकार तो लो।