हम बगीचा भूल गए, बगीचे के फूल भूल गए, फूलों की
सुगंध भूल गए, बस स्मरण रहा कि मकरंद कैसे बनता है। हम सभी इसी मकरंद की तलाश में
लगे रहे, कुछ बच्चों ने बनाया, कुछ हमने बनाया और बस प्याला भर लाए।
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