Wednesday, September 12, 2012

नरेन्‍द्र से स्‍वामी विवेकानन्‍द का निर्माण : भारत का स्‍वाभिमान जागरण

द्वितीय कड़ी - गतांक से आगे - 
उनके पिता सफल एडवोकेट थे और वे अपनी वकालात के सिलसिले में कलकत्ता से बाहर अक्‍सर जाते रहते थे। एक बार वे रायपुर गए और उनके एक मुकदमें में उन्‍हें वहाँ कई वर्षों तक रहना पड़ा। ऐसे में उनके पिता ने भुवनेश्‍वरी देवी और परिवार को रायपुर ही बुला लिया। तीन वर्ष तक नरेन्‍द्र रायपुर रहे। 
पोस्‍ट को पूर्णरूप से पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें - 
http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%A8%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5-2/ 

3 comments:

Rohit Singh said...

आधुनिक भारत के पहले सश्कत विचारक जिनका जीवन आध्यात्मिक से लेकर राजनीतिक जीवन का आदर्श है।

अजित गुप्ता का कोना said...

@ boletobindas

आप सही कह रहे हैं, आपका आभार।

India Darpan said...

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।