Wednesday, December 26, 2012

क्‍या करेंगे ये चार करोड़ लोग?

क्‍या करेंगे ये चार करोड़ लोग?

स्‍त्री-पुरुष जनसंख्‍या में चार करोड़ का अन्‍तर। पुरुषों के मुकाबले चार करोड़ स्त्रियां कम। जाँच-परख कर और चुन-चुन कर मारा है हमने कन्‍या को। सभी को चाहिए अपने घर में एक पुरुष।
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Saturday, December 22, 2012

पुरुषों की स्‍वतंत्रता


अभी एक टिप्‍पणी पढ़ी, "शादी के बाद भी आप हँस रहे हैं, यह क्‍या कम है?" प्रतिदिन ऐसी ही ढेरों बातों से हमारा साक्षात्‍कार होता है। विवाह को बंधन, स्‍वतंत्रता छीननेवाला, गुलाम बनाने वाला आदि आदि कहा जाता है। पत्‍नी सभी के लिए मुसीबत होती है। इस पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - 
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Friday, December 14, 2012

हे भगवान! मुझे दुनिया का सबकुछ दे दो

भगवान का दरबार लगा है, मतलब मन्दिर सजा है। सैकड़ों भक्‍त कतार में लगे हैं। सभी हाथ जोड़े, आँख मूंदे, प्रार्थना कर रहे हैं। भगवान के जो सबसे समीप जा पहुँचा है, वह राजनेता बनने की जुगत बिठा रहा है। इस पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं - http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AC/

Saturday, December 8, 2012

राजा के दरबारियों की वर्दी

राजा के दरबारियों की वर्दी
एक युवा किसान था, अपने गाँव में खेती करता था और अपने माता-पिता के साथ प्रसन्‍नतापूर्वक रह रहा था। एक बार गाँव में राजा आए, उनके साथ उनका पूरा लाव-लश्‍कर भी आया। राजा ने अतिशोभनीय वस्‍त्र पहन रखे थे, उनके मंत्रियों की भी शोभा देखने लायक थी। यहाँ तक की उनके चाकर भी वर्दी में थे। पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6/

Sunday, December 2, 2012

Friday, November 23, 2012

केरियर, बॉस और विदेश के कारण विस्‍मृत पिता और परिवार

केरियर, बॉस और विदेश के कारण विस्‍मृत पिता और परिवार - इस पोस्‍ट को पूर्ण रूप से पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें - 
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Saturday, November 17, 2012

सफल व्‍यक्तित्‍व (Success histories) के संघर्ष देखिये ना कि उनका छिद्रान्‍वेषण करिए

सफलता का मंत्र यदि बाजार में बिकता तो शायद हम सभी खरीद लेते लेकिन यह बाजार में नहीं हमारे अन्‍दर की बुनावट में ही निहित होता है। हमारे जीवन का आग्रह किसी एक बिन्‍दु पर दृढ़ होता जाता है जिसे हम कई बार जुनून की संज्ञा भी देते हैं, तब ही व्‍यक्ति उस क्षेत्र में सफल हो पाता है। शेष पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - 
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Saturday, November 10, 2012

जन्‍मदिन पर स्‍वयं की पड़ताल - सामाजिक कार्यकर्ता की विडम्‍बना

जन्‍मदिन पर स्‍वयं की पड़ताल - सामाजिक कार्यकर्ता की विडम्‍बना
सार्वजनिक जीवन में सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिका कुछ ऐसी है, जैसे तलवार की धार पर चलना, जिसमें केवल घाव ही घाव है। या फिर तालाब के ऊपर बंधी रस्‍सी पर बांस के सहारे एक छोर से दूसरे छोर पर जाना। इस जीवन का मेरा अनुभव लगभग 22-23 वर्षों का है और कल ही याने 9 नवम्‍बर 2012 को अपने जीवन के 61 वर्ष पूर्ण किए हैं तो उस जीवन का सफर कैसा रहा, उस पुरानी सड़क पर भी मन दौड़ना चाह रहा है।
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Friday, October 12, 2012

दुनिया के किसी भी आश्‍चर्य से कम नहीं – अजन्‍ता और एलोरा की गुफाएं

औरंगाबाद से 120 किमी की दूरी पर स्थित अजन्‍ता गुफाएं भारतीय कला और संस्‍कृति की अनूठी मिसाल है। यह अद्भुत ही नहीं अपितु आश्‍चर्यचकित करने वाली हैं। दो किलोमीटर के दायरे में फैले पहाड़ के गर्भ में अनेक गुफाओं को कलाकारों ने इस प्रकार से तराशा है कि वे विश्‍व के आश्‍चर्यों में चाहे शामिल नहीं की गयी हो लेकिन वे किसी भी आश्‍चर्य से कम नहीं हैं। लेकिन इन्‍हें भारत के सात आश्‍चर्यो में अवश्‍य गिना जाता है। शेष पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - 
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Friday, October 5, 2012

समापन खण्‍ड – विवेकानन्‍द ने अमेरिका में 11 सितम्‍बर 1893 को भारतीय संस्‍कृति को स्‍थापित किया

खेतड़ी नरेश राजा अजीत सिंह‍ को पुत्र प्राप्ति हुई और तब उन्‍हें स्‍वामीजी का ध्‍यान आया। वे बेचैन हो गए, उन्‍होंने दीवान जी को कहा कि दीवान जी बहुत बड़ी भूल हो गयी है। मैं स्‍वामी जी को ही विस्‍मृत कर बैठा। लेकिन अब पुत्र जन्‍मोत्‍सव तभी मनाऊँगा जब स्‍वामी यहाँ आएंगे। 
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Friday, September 28, 2012

चतुर्थ खण्‍ड – स्‍वामी विवेकानन्‍द कन्‍याकुमारी स्थित श्रीपाद शिला पर

सेतुपति से मिलने से पूर्व मद्रास के मन्‍मथ बाबू के साथ स्‍वामी रामेश्‍वरम् की यात्रा के लिए निकले लेकिन मन्‍मथ बाबू को सरकारी काम से नागरकोइल तक जाना था। नागरकोइल पहुंचकर मन्‍मथबाबू ने स्‍वामीजी को कहा कि यहाँ से कन्‍याकुमारी मात्र 12मील है। स्‍वामीजी ने कन्‍याकुमारी जाने का निश्‍चय किया। पोस्‍ट को पूरा पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं -
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Saturday, September 22, 2012

तृतीय खण्‍ड – विवेकानन्‍द राजस्‍थान में

गतांक से आगे - तृतीय खण्‍ड
स्‍वामी विवेकानन्‍द के लिए राजपुताने का महत्‍व सर्वाधिक रहा है। राजपुताना ही ऐसा प्रदेश था जहाँ उन्‍होंने व्‍यापक स्‍तर पर बौद्धिक चर्चाएं प्रारम्‍भ की। सभी वर्गों और सभी सम्‍प्रदायों को अपने ज्ञान से अभिभूत किया। उनके पास राजा भी नतमस्‍तक हुए और रंक भी, उनके पास हिन्‍दु भी आए और मुसमलमान भी। वृन्‍दावन से निकलकर उन्‍होंने राजपुताने का रुख किया और सर्वप्रथम अलवर आए। पूरी पोस्‍ट के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें - 
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Wednesday, September 12, 2012

नरेन्‍द्र से स्‍वामी विवेकानन्‍द का निर्माण : भारत का स्‍वाभिमान जागरण

द्वितीय कड़ी - गतांक से आगे - 
उनके पिता सफल एडवोकेट थे और वे अपनी वकालात के सिलसिले में कलकत्ता से बाहर अक्‍सर जाते रहते थे। एक बार वे रायपुर गए और उनके एक मुकदमें में उन्‍हें वहाँ कई वर्षों तक रहना पड़ा। ऐसे में उनके पिता ने भुवनेश्‍वरी देवी और परिवार को रायपुर ही बुला लिया। तीन वर्ष तक नरेन्‍द्र रायपुर रहे। 
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Saturday, August 25, 2012

नरेन्‍द्र से स्‍वामी विवेकानन्‍द का निर्माण : भारत का स्‍वाभिमान जागरण



स्‍वामी विवेकानन्‍द का यह 150वां जन्‍मशताब्‍दी वर्ष है। यदि नरेन्‍द्र से विवेकानन्‍द बनने की यात्रा पूर्ण नहीं होती तो आज भारत अपना स्‍वाभिमान खोकर यूरोप का एक उपनिवेश के रूप में स्‍थापित हो जाता। भारत का हिन्‍दुत्‍व कहीं विलीन हो जाता और ईसाइयत महिमा मण्डित हो जाती। त्‍यागवादी एवं परिवारवादी भारतीय संस्‍कृति का स्‍थान भोगवादी एवं व्‍यक्तिवादी पाश्‍चात्‍य संस्‍कृति ने ले लिया होता। इसलिए आज स्‍वामी विवेकानन्‍द के महान त्‍याग को स्‍मरण करने का दिन है। जिस प्रकार एक सैनिक सीमाओं पर रात-दिन हमारी रक्षा के लिए अपनी युवावस्‍था को कुर्बान कर देता है उसी प्रकार स्‍वामी विवेकानन्‍द ने अपना जीवन भारत की संस्‍कृति को बचाने में कुर्बान कर दिया था। उनकी जीवन यात्रा को समझने के लिए श्री नरेन्‍द्र कोहली का उपन्‍यास “तोड़ो कारा तोड़ो” श्रेष्‍ठ साधन है। उसी के आधार पर नरेन्‍द्र से स्‍वामी विवेकानन्‍द के जीवन निर्माण की यात्रा का सं‍क्षिप्तिकरण प्रस्‍तुत है।  

Wednesday, August 8, 2012

उद्देश्‍य रहित जीवन की भी आवश्‍यकता है



कहते है जीवन का कोई उद्देश्‍य होना चाहिए लेकिन मुझे लगता है कि एक आयु के बाद जीवन उद्देश्‍य रहित होना चाहिए। जब जीवन में उद्देश्‍य लेकर चलते हैं तो किसी न किसी मंजिल को पाने की चाहत रहती है। मंजिल में अनेक सहयात्री होते हैं। सभी उस मंजिल को पाना चाहते हैं। स्‍वाभाविक रूप से एक प्रतिस्‍पर्द्धा का जन्‍म होता है। कई बार अनावश्‍यक ईर्ष्‍या भी जन्‍म ले लेती है। - शेष पोस्‍ट पढ़ने के लिए निम्‍न लिंक पर जाएं। 
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Tuesday, July 17, 2012

खबर बहादुर



हमारे देश में राय-बहादुरों का कमी नहीं होती। आपको हर घर में, मोहल्‍ले में, नगर में जितने ढूंढों मिल जाएंगे। आप कैसी भी मुसीबत में हों, वे आपको सुखी जीवन का कोई न कोई सुझाव दे ही देंगे। इन्‍हीं राय-बहादुरों की तर्ज पर एक जमात और उग रही है, वह है खबर-बहादुर। शेष पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - www.sahityakar.com 

Friday, July 13, 2012

हम प्रतिदिन जहर पी रहे हैं तो प्रेम कहाँ से उपजेगा?



सुबह की पहली किरण के साथ ही एक भूख जन्‍म लेती है, दुनिया को जानने की, अपने आस-पास हो रही गतिविधियों को समझने की और घटनाओं से अपने आपको सावधान करने की। इसलिए दरवाजे पर दस्‍तक दे रहा समाचार-पत्र तत्‍काल ही हाथ में आ जाता है। समाज और देश की सारी विद्रूपताएं एकत्र होकर उन पन्‍नों में समायी होती हैं। ------ शेष पोस्‍ट पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें - www.sahityakar.com 

Saturday, July 7, 2012

अभिव्‍यक्ति को मार्ग दो, नहीं तो वह विस्‍फोट में बदल जाएगी

अभिव्‍यक्ति को मार्ग दो, नहीं तो वह विस्‍फोट में बदल जाएगी  -  पोस्‍ट का सम्‍पूर्ण रूप से पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं - www.sahityakar.com 

Thursday, June 28, 2012

मेरे मरने के बाद मुझपर रोना ना कि मेरे संग्रह को समेटने के लिए

मेरे मरने के बाद मुझपर रोना ना कि मेरे संग्रह को समेटने के लिए  - पोस्‍ट को पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें - www.sahityakar.com 

Monday, June 25, 2012

ब्‍लोगिंग करे तो कैसे करें?


ब्‍लोगिंग करे तो कैसे करें? पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं - www.sahityakar.com

Tuesday, June 19, 2012

लम्‍बी अनुपस्थिति के बाद वापसी

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Thursday, May 3, 2012

गर्मियों की छुट्टियां और मायके बनते घर

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Friday, April 27, 2012

हम अक्‍सर “यूज” होते हैं


हम अक्‍सर “यूज” होते हैं 
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Thursday, March 29, 2012

रिश्‍तों में एक खुशबू होती है, बस उसे मुठ्ठी में भरने की जरूरत है

रिश्‍तों में एक खुशबू होती है, बस उसे मुठ्ठी में भरने की जरूरत है 
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Friday, March 9, 2012

कविता के नाम पर फूहड़बाजी को कब तक बर्दास्‍त करें?

कविता के नाम पर फूहड़बाजी को कब तक बर्दास्‍त करें?
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Tuesday, February 21, 2012

रेलवे, सीनियर सि‍टीजन के लिए लोअर-बर्थ आवश्‍यक करे


भारतीय रेल, दुनिया की सबसे विशाल परियोजना है। लाखों यात्री प्रतिदिन एक शहर से दूसरे शहर और छोटे-छोटे गाँवों तक रेल के द्वारा ही यात्रा करते हैं। वर्तमान में महिलाओं के लिए 58 और पुरुषों के लिए 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के व्‍यक्तियों के लिए रियायती दरों पर यात्रा का प्रावधान है। कुछ वर्ष पूर्व घोषणा हुई थी कि पचास वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं को शयनयान डिब्‍बों में नीचे की शय्‍या मिलेगी। लेकिन यह घोषणा पूर्णतया लागू नहीं हो सकी।  इस माह मुझे कई बार रेल-यात्रा का अवसर मिला, कई बुजुर्गों को कठिनाई का सामना करते हुए देखा।
शेष - www.sahityakar.com पर पढ़े।

Tuesday, January 31, 2012

एक आवश्‍यक परिवर्तन, शायद यही समय की मांग है।



कल मेरा याहू अकाउण्‍ट हैक हो गया परिणाम स्‍वरूप मेरे सारे ही कांटेक्‍टस समाप्‍त हो गए। यह तो किसी हैकर का कमाल था लेकिन हमारी सरकार द्वारा तो गूगल को प्रतिदिन चेतावनी दी जा रही है कि हम गूगल की सर्विस को बन्‍द कर देंगे। इसलिए मैंने भी एक परिवर्तन करने का निश्‍चय कर लिया। मैंने एक वेबसाइट प्रारम्‍भ की है www.sahityakar.com  इसी पर वर्ड-प्रेस के माध्‍यम से अपना ब्‍लाग वहाँ शिफ्‍ट किया है। अभी ब्‍लागस्‍पाट पर भी मेरा ब्‍लाग रहेगा लेकिन धीरे-धीरे मैं पूर्णतया अपनी वेबसाइट पर ही आ जाऊँगी। अत: आप सभी से निवेदन है कि आप मेरी साइट पर जाकर मुझे सबस्‍क्राइब करें। जिससे आप मेरी पोस्‍ट पढ़ सकें और हम एक दूसरे से सम्‍पर्क में रह सकें। आभार।  

Wednesday, January 18, 2012

अतीत हमें वर्तमान में जीने नहीं देता



जिस किसी भी व्‍यक्ति के पास या देश के पास अपना अतीत नहीं होता वह वर्तमान में ही जीता है और भविष्‍य की कल्‍पना करता है लेकिन जिसके पास अतीत होता है वह अतीत में ही डूबा रहता है। वह वर्तमान में भी नहीं जी पाता और ना ही अपना भविष्‍य बना पाता है। एक बच्‍चे के पास उसका अतीत नहीं होता, वह वर्तमान को पूरी तरह से जीना चाहता है। प्रत्‍येक नयी वस्‍तु को पाना चाहता है। उसे पता नहीं होता कि अतीत क्‍या होता है? लेकिन इसके विपरीत एक प्रौढ़ व्‍यक्ति के पास उसका अतीत होता है इसी कारण वह अतीत में ही डूबा रहता है। अतीत के अनुभव उसे भविष्‍य की कल्‍पना भी नहीं करने देते। बच्‍चे के सामने एक नयी चमचमाती कार है, वह उसे पाने की कोशिश करता है। उसे पता नहीं कार के पहले भी कुछ था क्‍या। लेकिन इसके विपरीत उसके पिता ने कार के पहले का जीवन भी देखा है, कार से होने वाली दुर्घटनाएं भी देखी हैं तो वह अपने अतीत में चले जाता है और किशोरवय पुत्र को कार से दूर रहने को कहता है। किशोर अवस्‍था से युवावस्‍था में कदम ही रखा होता है कि विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण पैदा हो जाता है। बस उसे आकर्षण का मालूम है उसका इतिहास मालूम नहीं। लेकिन उसके माता-पिता को मालूम है। वह अतीत का भय उसे दिखाते हैं। सोच समझकर कदम रखने की सलाह देते हैं। ऐसे ही कितने उदाहरण है। इसी अतीत के कारण नए और पुराने का द्वंद्व बना रहता है।
ऐसा ही देशों के साथ भी होता है। सम्‍प्रदायों के साथ भी होता है। भारत देश का स्‍वर्णिम अतीत रहा है इसलिए यहाँ के लोग केवल अतीत में ही जीते हैं। वे वर्तमान को भी उसी तराजू में तौलते हैं और भविष्‍य की कल्‍पना में भी अतीत को ही ले आते हैं। इसके विपरीत जिन देशों का अतीत नहीं है वे केवल वर्तमान में जीते हैं और भविष्‍य को कैसे सुखी रखे बस इसकी कल्‍पना करते हैं। लेकिन अतीत हमेशा हानिकारक ही नहीं होता। अतीत से अनुभव आता है और हमें सही मार्ग चुनने का रास्‍ता मिलता है। इसलिए दोनों पीढियां एक दूसरे का सम्‍मान करते हुए अपना मार्ग तय करें तो शायद हम सभी का भविष्‍य ज्‍यादा सुरक्षित रह सकता है। भारत भी यदि दूसरे देशों से वर्तमान में जीना सीख लें तो भारत का भविष्‍य भी ज्‍यादा सुखी हो सकता है। इस विषय के अनेक पहलु हैं, जब आप पढ़ेंगे तो लगेगा कि बहुत कुछ छूट गया है। मैंने चलाकर ही छोड़ा है, जिससे आप सभी अपने अनुभवों से इसे पूरा कर सकें।
( विशेष बहुत दिनों से कोई पोस्‍ट नहीं लिखी थी, इसलिए यह संक्षिप्‍त सी पोस्‍ट प्रेषित कर रही हूँ )