Saturday, September 22, 2012

तृतीय खण्‍ड – विवेकानन्‍द राजस्‍थान में

गतांक से आगे - तृतीय खण्‍ड
स्‍वामी विवेकानन्‍द के लिए राजपुताने का महत्‍व सर्वाधिक रहा है। राजपुताना ही ऐसा प्रदेश था जहाँ उन्‍होंने व्‍यापक स्‍तर पर बौद्धिक चर्चाएं प्रारम्‍भ की। सभी वर्गों और सभी सम्‍प्रदायों को अपने ज्ञान से अभिभूत किया। उनके पास राजा भी नतमस्‍तक हुए और रंक भी, उनके पास हिन्‍दु भी आए और मुसमलमान भी। वृन्‍दावन से निकलकर उन्‍होंने राजपुताने का रुख किया और सर्वप्रथम अलवर आए। पूरी पोस्‍ट के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें - 
http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%A4%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%96%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%A6/

1 comment:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (23-09-2012) के चर्चा मंच पर भी की गई है!
सूचनार्थ!