Friday, September 23, 2016

शिकारी और शिकार

बंदरों पर एक वृत्त-चित्र का प्रसारण किया जा रहा था – ताकतवर नर बन्दर अपना मादा बन्दरों का हरम बनाकर रहता है और किसी अन्य युवा बन्दर को मादा से यौन सम्बन्ध बनाने की अनुमति नहीं है। यदि युवा बन्दर उस मठाधीश को हरा देता है तो वह उस हरम का मालिक हो जाता है।
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Sunday, September 18, 2016

कितना गोपनीय जीवन बना लेते हैं कुछ लोग

अभी-अभी एक sms आया – 13 दिन शेष हैं, अपनी छिपी सम्पत्ती उजागर करने के लिये। अपनी जेब पर निगाह गयी, कहीं कुछ छिपा है क्या? यहाँ तो जिसे सम्पत्ती कहें ऐसा भी कुछ नहीं है लेकिन खुद को धनवान तो हमेशा से ही माना है। एक खजाना है जो मन के किसी कोने में दुबका बैठा है, जैसे ही कोई अपना सा मन लेकर आता है, वह खजाना बांध तोड़ता सा बाहर निकल आता है।
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Saturday, September 17, 2016

आदत नवाबी की और सफर रेल का

अब वे सुबह 6 बजे से ही चाय वाले की बाट जोहने लगे कि चाय वाला साहब के लिये ट्रे सजाकर चाय लाएगा। मैं लगातार यात्रा और काम के कारण थकी हुई थी तो नींद पूरी कर लेना चाहती थी, इसलिये जब उदयपुर आने लगा तब मेरी आँख खुली। मेरे जगते ही उन्होंने पूछा कि यहाँ चाय नहीं आती।
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Saturday, September 3, 2016

श्मशान में पसरी गन्दगी – क्या यही मृत्यु संस्कार है?

शव को ले जाने का मार्ग कैसा हो, क्या यह हमारे लिये चिन्तनीय नहीं  होना चाहिए? जिस मार्ग पर नालियों का गन्दा पानी एकत्र हो, गन्दगी का ढेर लगा हो, क्या ऐसे मार्ग से हम अपने प्रियजन को विदाई देने जाते हैं? समाज बड़े-बड़े आयोजन करता है, लेकिन इस अन्तिम सत्य को नजर-अंदाज कर देता है, यह मेरे लिये तो बहुत ही कष्टकारी होता है, जब इस दृश्य को रोज ही देखना पड़ता है।
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Wednesday, August 31, 2016

प्रेम की सूई दिखायी देती नहीं

हर व्यक्ति के पास इतना ज्ञान आ गया है कि वह ज्ञान देने के लिये लोग ढूंढ रहा है, बस जैसे ही अपने लोग मिले कि ज्ञान की पोटली खुलने लगती है और बचपन मासूम सा बनकर कोने में जा खड़ा होता है।
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Wednesday, August 24, 2016

हम से अब पराया केक खाया नहीं जाएगा

अपने गाँव-देहात में कभी रसोइये के हाथ में 500 रूपये धरती तो कभी मेहतरानी के हाथ में पचास रूपये धर कर खुश हो लेती और दान के भाव को बनाकर अपने स्वाभिमान को सहेजकर रख लेती घर की दादी अब उलझन में झूलने लगी। क्या-क्या बिसरा दूँ?
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Tuesday, August 16, 2016

क्या सच में गाँव बदल रहे हैं?

इन लड़कियों की अल्हड़ता क्या ऐसी ही बनी रहेगी? इन लड़कों का नृत्य क्या ऐसे ही देश प्रेम को सार्थक करता रहेगा? क्या इन नन्हें बच्चों में से कोई गाँव की कमान सम्भाल लेगा? स्वतंत्रता दिवस की यह साफ-सफाई क्य़ा हमेशा ही गाँव को स्वच्छ बना देगी? क्या महिलायें पूरी शक्ति के साथ ऐसे ही घर-परिवार और देश के झण्डे को लहराती रहेंगी?
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