Wednesday, August 24, 2016

हम से अब पराया केक खाया नहीं जाएगा

अपने गाँव-देहात में कभी रसोइये के हाथ में 500 रूपये धरती तो कभी मेहतरानी के हाथ में पचास रूपये धर कर खुश हो लेती और दान के भाव को बनाकर अपने स्वाभिमान को सहेजकर रख लेती घर की दादी अब उलझन में झूलने लगी। क्या-क्या बिसरा दूँ?
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Tuesday, August 16, 2016

क्या सच में गाँव बदल रहे हैं?

इन लड़कियों की अल्हड़ता क्या ऐसी ही बनी रहेगी? इन लड़कों का नृत्य क्या ऐसे ही देश प्रेम को सार्थक करता रहेगा? क्या इन नन्हें बच्चों में से कोई गाँव की कमान सम्भाल लेगा? स्वतंत्रता दिवस की यह साफ-सफाई क्य़ा हमेशा ही गाँव को स्वच्छ बना देगी? क्या महिलायें पूरी शक्ति के साथ ऐसे ही घर-परिवार और देश के झण्डे को लहराती रहेंगी?
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Friday, August 5, 2016

उदयपुर का सौन्दर्य – उभयेश्वरजी के पर्वत

इस प्रकृति की अनुपम देन को जितना देखो उतना ही अपनी ओर आकर्षित करती है लेकिन दिन तेजी से ढल रहा था और अब जंगल कह रहे थे कि हमें एकांत चाहिये। किसी शहंशाह की तरह जंगल ने भी कहा एकान्त! और हम वापस चले आये, उस खूबसूरती को आँखों में संजोये, फिर आने की उम्मीद के साथ।

Friday, July 29, 2016

गुलाम बन रहे हैं हम

आज दुनिया का अधिकांश व्यक्ति गुलामी का जीवन जी रहा है, वह किसी भी दिन सड़क पर आ सकता है। इसमें खुद को राजा समझने वाले लोग भी हैं और सामान्य प्रजा भी। आज राजा भी तो वोट के सहारे ही जिन्दा है! वोट के लिये उसे क्या-क्या नहीं करना पड़ता! अपना धर्म तक गिरवी रखना पड़ता है। जिस कलाकार को हम मरजी का मालिक मानते थे आज वह भी गुलामी का जीवन जीने लगा है।
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Sunday, July 24, 2016

मूर्ख दुनिया सड़ा आटा खाती है

20 रूपये किलो का गैंहूं, सड़ने के बाद 2 रूपये किलो में मिल जाता है। अब इस सड़े गैंहूँ का मैदा आसानी से बन जाता है जो 30 रूपये किलो बिकता है। बिना मेहनत के जो चापड़ निकलता है उसे भी मंहगे दाम पर बेच दिया जाता है।
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Tuesday, July 19, 2016

मन तड़पत गुरु दर्शन को आज

महिला का व्यक्तित्व भी कुछ ऐसा ही होता है। उसकी महिला पहचान इतनी बड़ी है कि उसे इससे अधिक की पहचान के लिये गुरु मिलना कठिन हो जाता है। कहीं वह बहन-बेटी के रूप में देखी जाती है तो कहीं भोग्या के रूप में।
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Tuesday, July 12, 2016

नो त्याग – नो आग

त्याग का ठेका मोदीजी के साथ किसी दूसरे देश में भेजो अब। वे आसानी से इसे दूसरे के चिपका भी आएंगे, उनसे कहो कि योग दिवस से बाद त्याग दिवस मनाने की पृथा शुरू करा दें जिससे इस त्याग के देवता का ध्यान भारत से कुछ कम हो सके। हमारे यहाँ भी ठण्डी बयार बह सके।
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