Friday, September 28, 2012

चतुर्थ खण्‍ड – स्‍वामी विवेकानन्‍द कन्‍याकुमारी स्थित श्रीपाद शिला पर

सेतुपति से मिलने से पूर्व मद्रास के मन्‍मथ बाबू के साथ स्‍वामी रामेश्‍वरम् की यात्रा के लिए निकले लेकिन मन्‍मथ बाबू को सरकारी काम से नागरकोइल तक जाना था। नागरकोइल पहुंचकर मन्‍मथबाबू ने स्‍वामीजी को कहा कि यहाँ से कन्‍याकुमारी मात्र 12मील है। स्‍वामीजी ने कन्‍याकुमारी जाने का निश्‍चय किया। पोस्‍ट को पूरा पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं -
http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%9A%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5-%E0%A4%96%E0%A4%A3%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%A1-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E2%80%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%80-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B5/ 

4 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (29-09-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

India Darpan said...

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

smt. Ajit Gupta said...

लेकिन दुखद यह है कि विवेकानन्‍द भारत के गौरव को बढ़ाने वाले रहे है, फिर भी उनके ऊपर लिखे आलेख को कोई पढ़ने वाला नहीं। क्‍या ह‍म केवल भारत को धूल धूसरित ही देखना चाहते हैं?

आशा जोगळेकर said...

विवेकानंद जी के बारे में इस लेख को पढ कर खुशी हुई, कि कोई तो है जो उनके बारे में सोचता है पढता है उन्हें ।