Sunday, December 2, 2012

लिखना, पढ़ना और टिपियाना

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3 comments:

रविकर said...

आजादी टिप्पणी की, फिर करना क्यूँ खेल ।

तथ्य समाहित हों अगर, तभी भेजिए मेल ।

तभी भेजिए मेल, उठा पढ़ने की जहमत ।

अगर लगे उत्कृष्ट, यथोचित दीजे अभिमत ।

रविकर की कुंडली, श्रेष्ठ रचना की आदी ।

छाप लिंक-लिक्खाड़, टीप की दे आजादी ।।

smt. Ajit Gupta said...

रविकर जी आपका तो अंदाज ही निराला है।

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।