Friday, July 13, 2012

हम प्रतिदिन जहर पी रहे हैं तो प्रेम कहाँ से उपजेगा?



सुबह की पहली किरण के साथ ही एक भूख जन्‍म लेती है, दुनिया को जानने की, अपने आस-पास हो रही गतिविधियों को समझने की और घटनाओं से अपने आपको सावधान करने की। इसलिए दरवाजे पर दस्‍तक दे रहा समाचार-पत्र तत्‍काल ही हाथ में आ जाता है। समाज और देश की सारी विद्रूपताएं एकत्र होकर उन पन्‍नों में समायी होती हैं। ------ शेष पोस्‍ट पढ़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें - www.sahityakar.com 

8 comments:

महेन्द्र मिश्र said...

badhiya vicharaniy prastui...abhar

kshama said...

Muddaton baad aapko padha...bada achha laga....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति!
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (15-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

Mukesh Kumar Sinha said...

behtareen

bkaskar bhumi said...

अजित गुप्ता जी नमस्कार...
आपके ब्लॉग 'अजित गुप्ता का कोना' से लेख भास्कर भूमि में प्रकाशित किए जा रहे है। आज 23 जुलाई 'अभिव्यक्ति को मार्ग दो, नहीं तो वह विस्फोट में बदल जाएगी...' शीर्षक के लेख को प्रकाशित किया गया है। इसे पढऩे के लिए bhaskarbhumi.com में देख सकते है।
धन्यवाद फीचर प्रभारी
नीति श्रीवास्तव

Ajmer Hotels said...

this is very good about knowledge purpose ,,,,,,,,,,,,,

hotels in Nainital said...

i am very apreciate to words i always want toread it,,,,

Andaman Holidays said...

it's real fact that you are show in this blog....