Thursday, March 29, 2012

रिश्‍तों में एक खुशबू होती है, बस उसे मुठ्ठी में भरने की जरूरत है

रिश्‍तों में एक खुशबू होती है, बस उसे मुठ्ठी में भरने की जरूरत है 
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6 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति!
घूम-घूमकर देखिए, अपना चर्चा मंच
लिंक आपका है यहीं, कोई नहीं प्रपंच।।
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

dheerendra said...

वाह ! ! ! ! ! बहुत खूब सुंदर रचना,बेहतरीन भाव,....

MY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: तुम्हारा चेहरा,

singhSDM said...

बहुत सुन्दर....

Shah Nawaz said...

ब्लॉग बुलेटिन पर जानिये ब्लॉगर पर गायब होती टिप्पणियों का राज़ और साथ ही साथ आपकी इस पोस्ट को भी शामिल किया गया है आज के बुलेटिन में.

दिगम्बर नासवा said...

ऐसी भूली बिसरी यादें कभी कभि अचानक ही अतीत में ले जाती हैं और उस सुखद एहसास को जिन्दा कर जाती हैं ... ऐसे स्वार्थ हीन लम्हों को जीना और उन्हें यादों के आकाश में तारों की चमकते देखना बहित ही सुखद होता है .

anurag chanderi said...

जीवन में प्यार की वास्तविकता को दर्शाता यह लेख बहुत सार्थक एवं सटीक है, इतने प्यारे लेख के लिए धन्यवाद एवं बधाईयाँ .