इस दुनिया में तकरीबन सभी लोग अपने आने की सूचना देते हैं, तो उनका गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत भी होता है। लेकिन हम तो दबे पाँव ही इस दुनिया में चले आए। जब हमारी माँ को कई महिनों बाद पता लगा कि अरे कोई नवीन शायद आ रहा है तो घर भर में खलबली मच गयी कि अब और नहीं। कारण लड़की का होना नहीं था बस अब और संतान नहीं चाहिए थी क्योंकि पहले ही हमारे घर पर हाऊस फुल का बोर्ड टंग चुका था। लड़के सात हो चुके थे तो लड़कों से भी पेट भर गया था और एक लड़की भी अन्त में आ चुकी थी तो घर पूरा बन चुका था। लेकिन अब क्या कर सकते थे? हमारा भाग्य तो विधाता ने तभी लिख दिया था कि इस दुनिया में वाण्टेड नहीं हो। लेकिन हमने भी ठान ली थी कि अनवाण्टेड हैं तो क्या एक दिन लोगों के दिलों में राज करके बताएंगे। भगवान ने भेजा हमें अलटप्पू में ही था लेकिन भेजा था खास बनाकर। हम बचपन से ही खास बन गए, पता नहीं क्यों? जोर जबरदस्ती ही जब घर में घुसे थे तो जबरदस्त तो होने ही थे।
साधारण बचपन में भी जीवन असाधारण था। पिता का कठोर अनुशासन था या यूं कहें कि उनका बनाया हुआ ही शासन था। घर में उनकी मर्जी के बिना पत्ता नहीं हिल सकता था। वे जो कहें केवल वही सत्य। उन्होंने ही जीवन का निर्धारण किया। हम कर भी क्या सकते थे? पिताजी के सामने अच्छे-अच्छों की नहीं चलती थी तो हमारी क्या बिसात थी? उन्होंने हमें लड़कों की तरह ही पाला तो स्वीट सिक्सटीन कब हुए पता ही नहीं चला। प्यार व्यार क्या होता है इस चिड़िया का तो कभी पंख भी नहीं फड़फड़ाया। जैसे सब की शादी होती है हमारी भी हो गयी, हाँ कुछ रोचक तरीके से जरूर हुई। ना ना करते शादी तुम्ही से कर बैठे वाले अंदाज में। महिला होने का फायदा शादी के बाद भी नहीं मिला। दिल विल प्यार व्यार क्यों होता है पता ही नहीं चला और दिमाग में कर्तव्य आकर बैठ गया। तब से अब तक कर्तव्य ही निभाते रहे। पाँच वर्ष पूर्व दोनों बच्चों का विवाह भी कर दिया और दोनों के एक-एक संतान भी हो गयी। मतलब अपनी ड्यूटी पूर्ण। अब जीवन में आनन्द ही आनन्द।
आज अंग्रेजी तारीख से हमारा जन्मदिन पड़ता है, भारतीय तारीख तो देव उठनी ग्यारस की है तब शुभ मुहुर्त्त प्रारम्भ होते हैं, अर्थात् हमारे जन्म के बाद से ही शुभ प्रारम्भ होता है। लेकिन 9 नम्बर भी बुरा नहीं था तो हमने एक सा और सरलता का चुनाव करते हुए अंग्रेजी तारीख को अपना ही लिया। घर में तो आज भी वही ग्यारस है। इतनी लम्बी चौड़ी बात लिखने का अर्थ यह है कि हमने जोर जबरदस्ती से 59 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं और अब स्वीट सिक्सटी में प्रवेश कर लिया है। स्वीट सिक्सटीन की याद नहीं तो स्वीट सिक्सटी ही सही। इस आयु को पूर्ण कर लेने के बाद बहुत सारे सरकारी प्रिविपर्स चालू हो जाते हैं तो एक वर्ष तो स्वीट सिक्सटी का उल्लास मनाएंगे और फिर सरकारी सुविधाओं का आनन्द उठाएंगे। आप सभी बधाई तो देंगे ही तो मैं पहले ही सभी का आभार मान लेती हूँ। आज प्रकृति भी मेहरबान है तो सुबह से ही उसने भी हमारे स्वागत के लिए वर्षा जल का छिड़काव कर दिया है तो भगवान का भी आभार। उसने हमें भेजा दबे पैर था लेकिन अब हम सबके सामने प्रसन्नता से खड़े हैं उस प्रभु के आशीर्वाद से ही। आप सभी का स्नेह बना रहे, इसी आशा और विश्वास के साथ जन्मदिन पर आप सभी को मेरा नमन।