Wednesday, July 6, 2016

माँ का अभाव – टीस जीवन भर की

अक्सर संतानें माँ के प्रेम का मौल समझ ही नहीं पाती लेकिन जिन किसी को माँ का प्रेम नहीं मिलता उनसे पूछो कि वे इस प्रेम के अभाव को कैसे अनुभूत करते हैं। उनके जीवन की सबसे बड़ी टीस होती है, माँ के प्रेम का अभाव।
इस पोस्ट को पढ़ने क् लिये इस लिंक पर क्लिक करें - http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%B8-%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%AD%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%80/ 

2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (08-07-2016) को "ईद अकेले मना लो अभी दुनिया रो रही है" (चर्चा अंक-2397) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

smt. Ajit Gupta said...

आभार।