Sunday, January 4, 2009

शब्‍द जो मकरंद बने

शब्‍द जो मकरंद बने पुस्‍तक से एक कविता
वसीयत
मेरे अन्दर जितने शब्द बसे हैं
कुछ तो बाँटे पर कुछ शेष रहे हैं
जीवन की इस ढलती संध्या में
मेरी इस पूँजी पर किसका नाम लिखा है?

गठजोड़े में बँधकर
जब घर में नाजुक पैर पड़ेंगे
उस दिन मेरी मुट्ठी में
देने को क्या शेष बचेगा?
उसकी आँखों में सपने दूंगी या
दौलत की कुंजी उसके हाथ धरूँगी?
जब हाथ बढ़ेंगे मेरे पैरों तक
कुछ शब्द लबों पर आएंगे
उनको ही माथे पर अंकित कर दूँ?
या उसके हाथों को पूँजी से भर दूँ?
क्या मेरी इस पूँजी पर उसका नाम लिखा है?

इक दिन ऐसा भी आएगा
सब कुछ देने को मन कर जाएगा
जाती बिटिया की झोली में
क्या-क्या मैं भर दूंगी?
हीरे पन्ने माणक या
इन शब्दों में भीगी दुनिया?
उसकी मुट्ठी में चुपके से रख दूंगी
एक पिटारी प्यारे से शब्दों की
उन शब्दों से शायद मिल जाए
मन को जीतने की कुंजी!
शेष बची पूँजी पर क्या
बिटिया का नाम लिखा है?

मैं क्या देकर जाऊँगी?
यह सोच उभर कर आता है
किसे वसीयत कह दूँ मैं
यह भी मन जान ना पाता है?
कागज पर धन दौलत का जोड़ लिखूँ?
या केवल मन के शब्दों का मौल लिखूँ?
कौन वसीयत कहलाएगी
प्रश्न समझ नहीं आता है?
धन दौलत से तौली जाऊँगी
या मेरे शब्दों को मौल मिलेगा?
शब्दों की पूँजी पर बोलो
किसका नाम लिखा है?

मेरी दौलत को जब कूंता जाएगा
कुछ शब्द निकल कर आएंगे
इन शब्दों का यदि मौल करांेगे
मेरी पूँजी तो इससे ही आंकी जाएगी
मेरी वसीयत में धन दौलत का नाम नहीं
जो भी है बस मेरे अक्षर है
इन पर ना जाने किन-किन का नाम लिखा है?

दौलत तो रीति हो जाएगी
शब्दों से ही संसार बसेगा
मेरे शब्द विरासत में तुम देना
आने वाली हर पीढ़ी को
ये शब्द मधुरता लाएंगे
अपनों का भाव बताएंगे
गंगा में दौलत को अर्पित कर देना
पर इन शब्दों को जाने देना, उड़ने देना
दूर जहाँ तक जाएं ये
पीढ़ी दर पीढ़ी बसने देना
मेरे इन शब्दों में शायद
हर पीढ़ी का नाम लिखा है।

15 comments:

शोभित जैन said...

धन दौलत से तौली जाऊँगी
या मेरे शब्दों को मौल मिलेगा?

बहुत खूब शानदार रचना ||
स्वागत और साधुवाद ||

अमिताभ said...

most respected madamji,

"shabd brahm hai " aapki kavita ko padhkar yah ehsas hua .

shbd khuda bhi hai,
shbd dua bhi hai..

shabdo ki ye vasiyat ham sabhi ke liye virasat hai.

madamji mujhe aapki ye pankitayn abhut achchi lagi

उन शब्दों से शायद मिल जाए
मन को जीतने की कुंजी!
शेष बची पूँजी पर क्या
बिटिया का नाम लिखा है?

nav varsh ki shubhkamnaye !!

almighty bless you
with reagrds
amitabh

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

बहुत खूब...

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

गंगा में दौलत को अर्पित कर देना
पर इन शब्दों को जाने देना, उड़ने देना
दूर जहाँ तक जाएं ये
पीढ़ी दर पीढ़ी बसने देना
मेरे इन शब्दों में शायद
हर पीढ़ी का नाम लिखा है।


बहुत सुन्दर कविता...।

आदरणीया अजित जी, इस नये पृष्ठ के साथ आपका स्वागत है। उम्मीद है आपके विशाल अनुभव का लाभ हमें और आनए वाली पीढ़ियों को निरन्तर मिलता रहेगा। शब्द ‘ब्रह्म’ हैं इसलिए ये नष्ट नहीं होंगे।
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
ये word verification का लफ़ड़ा हटा दें। फालतू चीज है।

सागर नाहर said...

जाती बिटिया की झोली में
क्या-क्या मैं भर दूंगी?
हीरे पन्ने माणक या
इन शब्दों में भीगी दुनिया?
उसकी मुट्ठी में चुपके से रख दूंगी
एक पिटारी प्यारे से शब्दों की
उन शब्दों से शायद मिल जाए
मन को जीतने की कुंजी!


बहुत खूब, शायद बिटिया हीरे, पन्ने और माणक से ज्यादा शब्दों को सहेज कर रख सकेगी, जो सिर्फ उसके अपने लिये होंगे।.. बहुत ही उम्दा रचना, साधूवाद।

सागर नाहर
देवगढ़ मदारिया

Amit said...

bahut hi acchi vasiyat hai aapki....bahut hi acchi lagi aapki kavita padh kar...

प्रकाश बादल said...

वाह डॉ. साहब वाह बढ़िया कविता है। नए साल की आपको हार्दिक शुभकामनाएं।

Dr. Smt. ajit gupta said...

आप सभी का आभार। आप सभी ने मुझे जो प्रोत्‍साहन दिया उसे हमेशा दिल में सजा कर रखूंगी।
अजित गुप्‍ता

Suresh Chiplunkar said...

बहुत बढ़िया, हिन्दी ब्लॉग में आपका हार्दिक स्वागत है, शुभकामनायें… कृपया वर्ड वे्रिफ़िकेशन हटा दें ताकि टिप्पणी देने में कोई बाधा न हो… धन्यवाद

भगीरथ said...

शब्दों से ही ससार बसेगा
बहुत खूब्।
http://gyansindhu.blogspot.com

प्रदीप मानोरिया said...

बहुत भावभीनी रचना ह्रदय की गहराईयों की आवाज़ शब्दों के प्रवाह में बह निकली है आपका स्वागत है .... मेरे ब्लॉग पर भी दस्तक दें

Abhishek said...

मेरी दौलत को जब कूंता जाएगा
कुछ शब्द निकल कर आएंगे
इन शब्दों का यदि मौल करांेगे
मेरी पूँजी तो इससे ही आंकी जाएगी
Vasiyat ko lekar apni uljhan bakhubi rakhi hai aapne. Aapke shabd door tak pahunchein, Shubhkaamnayein.

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

आनंदकृष्ण said...

ब्लोगिंग की दुनिया में आपका स्वागत है. मेरी कामना है की आपके शब्दों को नई ऊंचाइयां और नए व गहरे अर्थ मिलें और विद्वज्जगत में उनका सम्मान हो.
कभी समय निकाल कर मेरे ब्लॉग पर एक नज़र डालने का कष्ट करें.
http://www.hindi-nikash.blogspot.com

सादर-
आनंदकृष्ण, जबलपुर.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

गंगा में दौलत को अर्पित कर देना
पर इन शब्दों को जाने देना, उड़ने देना
दूर जहाँ तक जाएं ये
पीढ़ी दर पीढ़ी बसने देना
मेरे इन शब्दों में शायद
हर पीढ़ी का नाम लिखा है।

अद्भुत रचना ...