Sunday, March 31, 2013

अब तो भईया बूढ़े हो गए, रंग नहीं बस गुलाल ही मल दो

होली आकर चले गयी। इसबार हम दुनिया जहान से दूर लेकिन अपनों के बीच चले गए। ना फेसबुक और ना ही ब्‍लाग। वापस आकर देखा तो पोस्‍टों का मेला लगा है, सभी अपने तरीके से होली मना रहे हैं। इस होली पर हमने काफी पहले ही कार्यक्रम बना लिया था कि अपनी बहन के साथ या यू कहूं कि जीजाजी के साथ होली मनाएंगे लेकिन ऐन वक्‍त पर जीजाजी तो धोखा दे गए और वे अमेरिका उड़ गए। पोस्‍ट पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%85%E0%A4%AC-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%AD%E0%A4%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%A2%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%97%E0%A4%8F-%E0%A4%B1%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%A8/ 

5 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

मूर्खता दिवस की मंगलकामनाओं के आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (01-04-2013) के चर्चा मंच-1181 पर भी होगी!
सूचनार्थ ...सादर..!

कविता रावत said...

बहुत बढ़िया ....

Manohar Chamoli said...

बढ़िया ...

smt. Ajit Gupta said...

कविताजी, मनोहर जी आपका आभार।

Anonymous said...
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