अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Showing posts with label old and new generation. Show all posts
Showing posts with label old and new generation. Show all posts
Tuesday, April 12, 2011

नयी पीढ़ी उवाच – आप नहीं समझोगे, वास्‍तव में हम नहीं समझ सकते – अजित गुप्‍ता

›
भारतीय रेल मानो संवाद का खजाना। कितनी कहानियां, कितने यथार्थों से यहाँ   आमना सामना होता है। कितने मुखर स्‍वर सुनाई देते हैं? बस आप एक मुद...
59 comments:
Sunday, December 26, 2010

बड़े लोग अपनी चलाते हैं, वे बदमिजाज होते हैं – अजित गुप्‍ता

›
एक वाकया याद आ रहा है। मेरे विवाह का अवसर था और मेरे पिताजी एक युवा डॉक्‍टर बराती से बहस कर रहे थे। पिताजी – मैं कहता हूँ कि बड़े लोग ज्‍या...
43 comments:
›
Home
View web version

About Me

अजित गुप्ता का कोना
View my complete profile
Powered by Blogger.