अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

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Monday, August 16, 2010

मन गाँव ही ले गया और महिला और पुरुष सरपंच का अन्‍तर भी समझ आ गया

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कल आजादी का पर्व था और सुबह-सुबह ही धर्म-संकट उपस्थित हो गया। 15 अगस्‍त होने के साथ कल रविवार भी था तो पिकनिक का दिन भी था। सुबह से ही लोग अ...
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Thursday, August 12, 2010

मन तो बंदी है आपके व्‍यक्तित्‍व का, उसे कैसे स्‍वतंत्र करोगे? – अजित गुप्‍ता

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अभी उदयपुर में रिमझिम का दौर जारी है। मन करता है कि बचपन की तरह ही किसी बरसाती नदी के किनारे जाकर बालू रेत पर पैरों से कूदूं और जब पैर अन्‍द...
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