अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Saturday, February 20, 2016

आग का दरिया है और डूब के जाना है

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कुछ लोगों का जीवन अपने परिवार तक सीमित होता है, उनके लिये ही सारा खटराग रहता है। लेकिन कुछ लोग अपने मन को भी टटोलते रहते है और वे कभी परिवा...
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Saturday, January 16, 2016

सच से भागते हम

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हमने अच्छाई के प्रतिमान गढ़ रखे हैं। मनुष्य के आदर्श को स्वयं में तलाशते हैं। आदर्श का प्रकटीकरण अपने परिवार में मानते हैं। अपने समाज को भी...
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Wednesday, January 6, 2016

अपमान और सम्मान

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जीवन के दो मूल शब्‍द - अपमान और सम्‍मान ( insult & respect ) मान शब्‍द मन के करीब लगता है, जो शब्‍द मन को क्षुद्र बनाएं वे अपमान ल...
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Tuesday, September 15, 2015

विवाह आत्‍माओं का मिलन या कन्‍या का पुरुष को समर्पण

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विवाह दो आत्‍माओं का मिलन है लेकिन सारी परिस्थियों को देखने के बाद लगता है कि कुछ लोगों ने भगवान रूपी पुरुष के समक्ष कन्‍या का समर्पण बना द...
Saturday, September 5, 2015

मैंने माँ-पिता से क्‍या सीखा?

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प्रथम गुरु माँ होती है। मैंने माँ से क्‍या सीखा? माँ के बाद पिता गुरु होते हैं। मैंने पिता से क्‍या सीखा? देखें आज आकलन करें। मेरे पिता दृढ़...
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Sunday, August 16, 2015

छैनी-हथौड़ी और कागज-कलम ही हैं इतिहास की संजीवनी

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गाँव-गाँव में पुरातन गाथायें कहीं भजनों में तो कहीं गीतों में संचित हैं। कहीं प्रस्‍तरों में आलेख उत्‍कीर्ण हैं, तो कहीं भित्ती चित्रों के ...
Wednesday, July 22, 2015

जीवन के अन्‍तरालों को खोजने की चाहत

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हम रोज अपने अन्‍दर कुछ न कुछ तलाशते हैं, हम कौन हैं, हमें क्‍या अच्‍छा लगता है, हमें क्‍या करना चाहिए। रोज अपनी आदतों को खोजते हैं, रोज अपन...
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