अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Monday, February 25, 2013

शरीर की आवश्‍यकताएं और उनका आधुनिक प्रबंधन

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घटना कुछ माह पुरानी है। मैं रेलमार्ग से उदयपुर से दिल्‍ली जा रही थी। अभी गाडी चलने में पर्याप्‍त समय था और मैं अपनी बर्थ पर आसन जमा चुकी...
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Sunday, February 17, 2013

तीन पीढ़ी का बचपन : कौन सही कौन गलत?

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कहते हैं बचपन की कसक जीवन भर सालती है। बचपन के अभाव जिन्‍दगी की दिशा तय करते हैं। कभी अभाव मिलते हैं और कभी अभावों का भ्रम बन जाता है। कभी ...
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Saturday, February 9, 2013

पुत्र-वधु परिवार की कुलवधु या केवल पुत्र की पत्‍नी?

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पुत्र के विवाह पर होने वाली उमंग से कौन वाकिफ नहीं होगा? घर में पुत्र-वधु के रूप में कुल-वधु के आने का प्रसंग परिवारों को रोमांचित करता रहा...
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Saturday, February 2, 2013

हमें वापस लाना होगा आठवी शताब्‍दी का उभय भारती व़ाला काल

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हमें वापस लाना होगा आठवी शताब्‍दी का उभय भारती व़ाला काल  इस पोस्‍ट को पढ़ने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक करें -  http://sahityakar.com/wor...
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Thursday, January 24, 2013

जीवन के दो मूल शब्‍द - अपमान और सम्‍मान (insult & respect)

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मान शब्‍द मन के करीब लगता है, जो शब्‍द मन को क्षुद्र बनाएं वे अपमान लगते हैं और जो शब्‍द आपको समानता का अनुभव कराएं वे मन को अच्‍छे लगते है...
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Saturday, January 19, 2013

बाकी है एक और बर्बरता के समाचार

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अभी एक और ज्‍वलंत समस्‍या से हमें दो-हाथ होना है। अभी पुरुष बर्बरता के कारण महिलाएं संकट में पड़ी है, देश और दुनिया इनकी बर्बरता का हल ढूंढ...
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Saturday, January 12, 2013

स्‍वामी विवेकानन्‍द के सांस्‍कृतिक नवजागरण में महिलाओं का योगदान

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स्‍वामी विवेकानन्‍द की 150वीं जन्‍मशताब्‍दी वर्ष पर विशेष स्‍वामी विवेकानन्‍द बाल्‍यकाल से ही सांस्‍कृतिक एवं आध्‍यात्मिक नवजागरण के...
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