अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Thursday, January 24, 2013

जीवन के दो मूल शब्‍द - अपमान और सम्‍मान (insult & respect)

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मान शब्‍द मन के करीब लगता है, जो शब्‍द मन को क्षुद्र बनाएं वे अपमान लगते हैं और जो शब्‍द आपको समानता का अनुभव कराएं वे मन को अच्‍छे लगते है...
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Saturday, January 19, 2013

बाकी है एक और बर्बरता के समाचार

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अभी एक और ज्‍वलंत समस्‍या से हमें दो-हाथ होना है। अभी पुरुष बर्बरता के कारण महिलाएं संकट में पड़ी है, देश और दुनिया इनकी बर्बरता का हल ढूंढ...
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Saturday, January 12, 2013

स्‍वामी विवेकानन्‍द के सांस्‍कृतिक नवजागरण में महिलाओं का योगदान

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स्‍वामी विवेकानन्‍द की 150वीं जन्‍मशताब्‍दी वर्ष पर विशेष स्‍वामी विवेकानन्‍द बाल्‍यकाल से ही सांस्‍कृतिक एवं आध्‍यात्मिक नवजागरण के...
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Sunday, January 6, 2013

आपको अभी तक याद है आपकी छत?

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घर की छत, शाम होते ही पानी से सरोबार हो जाने वाली छत। सुबह के साथ ही गहमा-गहमी वाल छत। शाम होते ही पहले पानी से छिड़काव किया जाता, बड़े करी...
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Wednesday, January 2, 2013

निरर्थक सदवचनों से समाज का वीरत्‍व समाप्‍त हो गया है

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कतिपय सदवाक्‍य, हमें अंधकार में धकेल रहे हैं अभी एक सदवाक्‍य पढ़ा - don’t find fault, find a remedy . चिकित्‍सकीय भाषा में एक बात ...
Wednesday, December 26, 2012

क्‍या करेंगे ये चार करोड़ लोग?

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क्‍या करेंगे ये चार करोड़ लोग? स्‍त्री-पुरुष जनसंख्‍या में चार करोड़ का अन्‍तर। पुरुषों के मुकाबले चार करोड़ स्त्रियां कम। जाँच-परख कर...
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Saturday, December 22, 2012

पुरुषों की स्‍वतंत्रता

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अभी एक टिप्‍पणी पढ़ी, "शादी के बाद भी आप हँस रहे हैं, यह क्‍या कम है?" प्रतिदिन ऐसी ही ढेरों बातों से हमारा साक्षात्‍कार होता है...
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