अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Friday, October 1, 2010

गाँव में भी अभिजात्‍य बनने का शौक और खुलना प्राइवेट स्‍कूल का

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आप सभी ने ग्रामीण परिसर के विद्यालय देखे होंगे। सरकारी विद्यालय - खेलने को बड़ा सा मैदान, बड़ी सारी बिल्डिंग और ढेर सारे अध्‍यापकगण। सा...
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Sunday, September 26, 2010

क्‍या आप विश्‍वसनीय हैं? बचपन के इस “प्रश्‍न” को आज मैंने अलविदा कह दिया है – अजित गुप्‍ता

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क्‍या आप विश्‍वसनीय हैं? यह प्रश्‍न मेरे आसपास हमेशा खड़ा हुआ रहता है। कभी पीछा ही नहीं छोड़ता। बचपन से लेकर प्रस्‍थान के नजदीक भी हमारा पी...
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Monday, September 20, 2010

बिटिया क्या है? मन की धड़कन? मन की खुशबू या फिर हमारा नवीन रूप?

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  बहुत दिनों से कोई कविता पोस्‍ट नहीं की थी, बस गद्य ही लिखती रही। संगीता स्‍वरूपजी ने कहा कि कोई कविता पोस्‍ट करें तो सोचने लगी कि कौन सी ...
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Friday, September 17, 2010

हम अपनी पुस्‍तकें किसे भेंट करते हैं? कद्रदान को या नामचीन को?

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इस पोस्‍ट को लिखने की प्रेरणा आज सुबह हुई, जब हमारे घर की विद्युत व्‍वस्‍था को देखने वाला मेकेनिक “ अहमद ” सुबह हमारे घर की घण्‍टी को दुरस्...
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Tuesday, September 14, 2010

आप विशेष हैं लेकिन पारिवारिक प्रेम आपको अतिविशेष बनाता है – अजित गुप्‍ता

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मेरी भान्‍जी का ढाई वर्षीय पुत्र है सम्‍यक। वह अभी कुछ दिन पहले ही अमेरिका से आया है, उसका जन्‍म भी वहीं हुआ था तो अधिकांश परिवार के सदस्‍य...
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Saturday, September 11, 2010

क्‍या आपको भी आपके दिमागी कीड़े (neurons) उकसाते हैं टिप्‍पणी करने पर

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मुझे जब से आप लोगों की संगत मिली है और जैसे-जैसे दुनियादारी की समझ बढ़ी है तभी से अपने दिमाग के न्‍यूरोन्‍स से बहुत सचेत रहती हूँ। कमबख्‍त ...
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Wednesday, September 8, 2010

मृत्‍यु के समय रीति-रिवाज और कर्मकाण्‍ड कितने जरूरी और कितने गैर जरूरी – अजित गुप्‍ता

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आज संगीताजी की एक पोस्‍ट कर्मकाण्‍डों को लेकर आयी। मुझे लगता है कि समाज में स्‍थापित कर्म-काण्‍ड और रीति-रिवाज पर चर्चा होनी चाहिए कि यह सा...
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