आपने किसी से प्रेम किया था? या आपके मन में आपके जीवनसाथी
की एक विशिष्ट कल्पना थी? इसके विपरीत आपका प्रेम या आपकी कल्पना साकार रूप ना ले
सकी हो तब ऐसे में आपने क्या किया? कल्पना कीजिए कि आपकी मनमर्जी के विरूद्ध
सगाई कर दी गयी हो और फिर कहा गया हो कि अब आप अपना मन मिलाने के लिए साथ-साथ
घूमते-फिरते रहिए। सम्पूर्ण पोस्ट पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F%E0%A4%82/
श्रीमती अजित गुप्ता प्रकाशित पुस्तकें - शब्द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्ध संग्रह) सैलाबी तटबन्ध (उपन्यास), अरण्य में सूरज (उपन्यास) हम गुलेलची (व्यंग्य संग्रह), बौर तो आए (निबन्ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्मरणात्मक यात्रा वृतान्त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।
Tuesday, October 28, 2014
Thursday, September 11, 2014
अमेरिका में भारतीयों का खानपान
भारत के प्रत्येक शहर में एक ऐसा चौक या गली जरूर
होगी जहाँ चाट खाते हुए लोग मिल जाएंगे। अभी तो प्लेटों का जमाना आ गया है लेकिन
अभी कुछ दिन पूर्व तक पत्ते पर चटपटी चाट खाने का आनन्द ही कुछ और था, उस पर लगी
चटनी को अंगुलियों से चाटने का या फिर पत्ते को जीभ से चाटने का स्वर्गीय आनन्द
ही कुछ और रहा है।
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Saturday, August 30, 2014
अमेरिका के बाजार : ग्राहक जाए बारबार
अमेरिका में शॉपिंग का अपना ही मजा है, आप 8 बाय 10
की दुकान से निकलकर सीधे ही आकाश के तारामण्डल में पहुँच जाते हैं। चारों तरफ एक
से बढ़कर एक सुन्दर और अपरिचित सामान बिखरा पड़ा है। किसी काउण्टर पर वियतनामियों
की भीड़ है तो कहीं चाइनीज है, कहीं यूरोपियन्स तो कहीं अमेरिकी और कहीं भारतीय।
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Saturday, August 9, 2014
कुछ प्यार दे आए और कुछ प्यार ले आए
हम बगीचा भूल गए, बगीचे के फूल भूल गए, फूलों की
सुगंध भूल गए, बस स्मरण रहा कि मकरंद कैसे बनता है। हम सभी इसी मकरंद की तलाश में
लगे रहे, कुछ बच्चों ने बनाया, कुछ हमने बनाया और बस प्याला भर लाए।
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Thursday, June 19, 2014
ज्रीरो जीव रो बेरी रे तू मत खाय परण्यो जीरो
जीरो जीव रो बेरी रे तू मत खाये परणा जीरो , यह कहावत बचपन से आज तक सुनते आए हैं, लेकिन जीरे से इतना परहेज रखने को क्यों कहा गया समझ नहीं आया। कुछ तो ऐसा है जीरे में जिसकी जांच पडताल भारत से सात समुद्र पार अमेरिका में भी हो रही है। भारत से आप जब चलते हैं तब आप सबकी अटेची खाने-पीने के सामान से भरी होती है। हमें पता नहीं यह क्यों लगता है कि अमेरिका में यह नहीं मिलेगा या वह नहीं मिलेगा।
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Tuesday, March 18, 2014
कहीं हम भी सठिया तो नहीं रहे हैं?
आप लोग न जाने किस किस से डरते होंगे लेकिन मुझे तो
अब स्वयं से ही डर लगने लगा है। हँसिये मत और ना ही आश्चर्य प्रकट कीजिए,
बड़े-बूढ़ों ने कहावत ऐसे ही नहीं बनायी थी - साठ साल में सठिया गया है बुढ्ढा। साठ
साल पूरा होते ही मन बेचैन रहने लगा है, अपनी हर बात पर शंका होने लगी है कि ये सठियाने
के लक्षण तो नहीं है?
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Tuesday, March 11, 2014
अण्डमान का सुन्दर द्वीप हेवलोक
एक और दर्शनीय और पर्यटकीय महत्व का द्वीप है – हेवलोक। प्रत्येक पर्यटक की मंजिल होती है हेवलोक। यहाँ समुद्र तट नाम के साथ नम्बरों में भी विभाजित हैं। राधानगर बीच अर्थात 7 नम्बर बीच सर्वाधिक खूबसूरत है। इसे एशिया का सातवें नम्बर का सर्वाधिक खूबसूरत बीच माना गया है।
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