अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

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Monday, September 14, 2009

नवगीत - बिखर पड़ा मन

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सिमट गए दायरे बिखर पड़ा मन बगियाँ के सामने ठिठक खड़ा वन। बरगद है गमले में कुण्‍डी में जामुन सुआ है पिंजरे में बिल्‍ली है आँगन छाँव गंध नायरे प...
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Thursday, July 2, 2009

नवगीत - एक गाँव में देखा मैंने

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एक गाँव में देखा मैंने सुख को बैठे खटिया पर अधनंगा था, बच्‍चे नंगे, खेल रहे थे मिटिया पर। मैंने पूछा कैसे जीते वो बोला...
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