अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Thursday, May 21, 2020

भीड़ से अलग होना ही असाधारण है

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www.sahityakar.com भीड़ में खड़ा हर व्यक्ति साधारण है लेकिन मंच पर बैठा व्यक्ति असाधारण हो जाता है। साधारण व्यक्ति को हम नहीं जानना चाह...
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Sunday, May 17, 2020

मन की किवड़ियां खोल

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www.sahityakar.com समय काटे से कट नहीं रहा है, एक अनजान भय भी सभी के सर पर मंडरा रहा है, लोग अपनी जमापूंजी का बहीखाता लेकर बैठ गये हैं।...
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Friday, May 8, 2020

डर कम होना चाहिए

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www.sahityakar.com दो खबरे एक साथ आयी, एक भाई ने बहन के कोरोना होने पर छत से छलांग लगायी और एक पोते ने दादी के कोरोना पोजेटिव होने पर फा...
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Monday, April 20, 2020

दोनों जीवन देख लिये

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www.sahityakar.com पुराने जमाने में विलासिता का प्रदर्शन दो जगह होता था – एक राजमहल तो दूसरा किसी गणिका का कोठा। हर आदमी लालायित रहता थ...
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Friday, April 17, 2020

आते रहा करो

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www.sahityakar.com निंदक टाइप के लोग बड़े कमाल के होते हैं, किसी की बाल की खाल निकालनी हो तो ये ही याद आते हैं। क्या मजाल ऐसे बन्दे किस...
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Thursday, April 16, 2020

बाहर आदमी है

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www.sahityakar.com न जाने कब से एक बात सुनी जा रही है - महिला को कहा जा रहा है कि अन्दर रहो, बाहर आदमी है! रात को बाहर मत आना क्योंकि बा...
Friday, March 27, 2020

बच्चों सुनाती हूँ तुमको कहानी

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www.sahityakar.com जब भी प्रश्न सामने खड़े हो जाते हैं हम अक्सर भूतकाल में चले जाते हैं, सोचने लगते हैं कि हमने पहले क्या किया था! हमार...
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