अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Monday, July 15, 2019

हम बड़े हैं, यही तो!

›
www.sahityakar.com हम बड़े हैं, हम बड़े हैं यही तो! फोर्ड गाडी का विज्ञापन देखा ही होगा। सदियों से हमारी रग-रग में बसा है कि हम बड़े है...
6 comments:
Tuesday, July 2, 2019

कबीले ही कबीले खड़े क्यों नहीं करते?

›
www.sahityakar.com घर में हम क्या करते हैं? या तो आपस में प्यार करते हैं या फिर लड़ते हैं। जब भी शान्त सा वातावरण होने लगता है, अजीब सी...
1 comment:
Monday, July 1, 2019

ना दीदी बची ना मैया, बाबा पड़े अकेले!

›
www.sahityakar.com आजकल अपने राहुल बाबा बड़े सकते में हैं, अकेले राहुल बाबा ही नहीं सारा परिवार ही सकते में आ गया है। पहले क्या था कि गा...
2 comments:
Sunday, June 30, 2019

नेहरू - शेख अब्दुल्ला और कश्मीर?

›
www.sahityakar.com किताबों के पन्ने पलटने का खेल बहुत खतरनाक है, वह भी इतिहास की किताबें। अब इतिहास तो तुम्हारे पुरखे ही लिख गये थे, तुम...
2 comments:
Saturday, June 29, 2019

मिट्टी पलीद करवा ली ना!

›
www.sahityakar.com मिट्टी पलीद कराना किसे कहते हैं, यह देखना हो तो कल राज्यसभा में देखना चाहिये था। मोदीजी हेडमास्टर बने हुए थे और सामन...
2 comments:
Thursday, June 27, 2019

एक पुरुष भीगे नयनों से देख रहा था प्रलय प्रवाह

›
www.sahityakar.com आपको चेहरे पर यह मायूसी! आपका चेहरा गमगीन! आपका चेहरा मुरझाया हुआ! आप तो मक्कारी के लिये जाने जाते हैं, आप तो आँख मार...
3 comments:
Monday, June 24, 2019

खानदान पुराना और खानसामा नया

›
www.sahityakar.com मणि नाम का साँप वापस अपने बिल से निकला, चारों तरफ देखा कि बाढ़ का पानी उतर तो गया है ना? कहीं जंगल में मोर तो नाच ...
3 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

अजित गुप्ता का कोना
View my complete profile
Powered by Blogger.