अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Monday, November 26, 2018

कालपात्र की तरह खानदान को उखाड़ने का समय

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फिल्म 102 नॉट ऑउट का एक डायलॉग – चन्द्रिका को तो एलजाइमर था इसलिये वह सारे परिवार को भूल गयी लेकिन उसका बेटा अमोल बिना अलजाइमर के ही सभी ...
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Friday, November 23, 2018

सावधान पार्थ! सर संधान करो

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ऐसी कई कहावतें हैं जिनके प्रयोग पर मुझे हमेशा से आपत्ति रही है, उनमें से एक है – निन्दक नियरे राखिये, आंगन कुटी छवाय। बिन पानी, साबुन बिन...
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Wednesday, November 21, 2018

इस पाले की – उस पाले की या नोटा की भेड़ें

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चुनाव भी क्या तमाशा है, अपनी-अपनी भेड़ों को हांकने का त्योहार लगता है। एक खेत में कई लोग डण्डा गाड़कर बैठ जाते हैं और भेड़ों को अपनी-अपनी...
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Thursday, November 15, 2018

कहाँ सरक गया रेगिस्तान!

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बचपन में रेत के टीले हमारे खेल के मैदान हुआ करते थे, चारों तरफ रेत ही रेत थी जीवन में। हम सोते भी थे तो सुबह रेत हमें जगा रही होती थी, खा...
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Friday, October 26, 2018

अतिथि तुम कब जाओगे?

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जब बच्चे थे तब भी दीवाली की सफाई करते थे और अब, जब हम बूढ़े हो रहे हैं तब भी सफाई कर रहे हैं। 50 साल में क्या बदला? पहले हम ढेर सारा सामान...
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Thursday, October 25, 2018

इस ओर ध्यान दीजिए माननीय

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यह जो श्रद्धा होती है ना वह सबकी अपनी-अपनी होती है, जैसे सत्य सबके अपने-अपने होते हैं। अब आप कहेंगे कि सत्य कैसे अलग-अलग हो सकते हैं? जिसे...
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Tuesday, October 23, 2018

मैं इसे पाप कहूंगी

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अभी शनिवार को माउण्ट आबू जाना हुआ, जैसे ही पहाड़ पर चढ़ने लगे, वन विभाग के बोर्ड दिखायी देने लगे। "वन्य प्राणियों को खाद्य सामग्री ड...
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