अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Monday, July 30, 2018

बड़प्पन की चादर उतार दीजिए ना

›
लोग अंहकार की चादर ओढ़कर खुशियाँ ढूंढ रहे हैं, हमने भी कभी यही किया था लेकिन जैसे ही चादर को उठाकर फेंका, खुशियाँ झोली में आकर गिर पड़ी...
7 comments:
Saturday, July 28, 2018

बातें हैं तो हम-तुम हैं

›
बातें – बातें  और बातें , बस यही है जिन्दगी। चुप तो एक दिन  होना ही है। उस अन्तिम चुप के आने तक जो बातें हैं वे ही हमें जीवित रखती हैं। ...
2 comments:
Tuesday, July 24, 2018

लेखक वहीं क्यों खड़ा है!

›
रोजमर्रा की जिन्दगी को जीना ही जीवन है और रोजमर्रा की जिन्दगी को लिखना ही लेखन है। रोज नया सूरज उगता है , रोज नया जीवन खिलता है , रोज न...
2 comments:
Monday, July 23, 2018

मोदी को पकड़कर वैतरणी पार करना

›
लोकतंत्र में छल की कितनी गुंजाइश है यह अभी लोकसभा में देखने को मिली। कभी दादी मर गयी तो कभी बाप मर गया से लेकर ये तुमको मार देगा और वो तु...
7 comments:
Thursday, July 19, 2018

काले बदरा और पहाड़ का मन्दिर

›
आँखों के सामने होती है कई चीजें लेकिन कभी नजर नहीं पड़ती तो कभी दिखायी नहीं देती! कल ऐसा ही हुआ , शाम को आदतन घूमने निकले। मौसम खतरनाक ह...
3 comments:
Wednesday, July 18, 2018

अनावश्यक नुक्ताचीनी से बचो

›
चटपटी खबरों से मैं दूर होती जा रही हूँ , डीडी न्यूज के अतिरिक्त कोई दूसरी न्यूज नहीं देखती तो मसाला भला कहाँ से मिलेगा। आप लोग कहेंगे कि...
2 comments:
Thursday, July 12, 2018

बेगम जान

›
एक पुरानी फिल्म जो शायद दो साल पहले अपनी कहानी पर्दे पर कह रही थी , उसकी चर्चा भला मैं आज क्यों करना चाहती हूँ , यही सोच रहे हैं ना आप!...
3 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

अजित गुप्ता का कोना
View my complete profile
Powered by Blogger.