अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Wednesday, May 2, 2018

शेर की किरकिरी

›
शेर और शेर के बच्चों से परेशान होकर मैंने सच्चे शेर की तलाश में नेशनल ज्योग्राफी चैनल पर दस्तक दे दी। खोलते ही जो दृश्य था वह बता दूं – ए...
10 comments:
Sunday, April 22, 2018

लुंज-पुंज से लेकर छूट और लूट की दुकान

›
लुंज-पुंज से लेकर छूट और लूट की दुकान आज एक पुरानी कथा सुनाती हूँ , शायद पहले भी कभी सुनायी होगी। राजा वेन को उन्हीं के सभासदों ने मार...
3 comments:
Friday, April 20, 2018

जी-हुजूरियें आखिरी दाँव ढूंढ रहे हैं

›
बात 90 के दशक की है , हमारे कॉलेज में जब परीक्षाएं होती थी तब परीक्षा केन्द्रों पर सारे ही अध्यापकों की ड्यूटी लगती थी , लेकिन मेरी कभी...
6 comments:
Tuesday, April 17, 2018

औरंगजेब के काल की याद आ रही है

›
पिछले कई दिनों से रह-रहकर औरंगजेब के काल की याद आ रही है , देश के किसी मन्दिर को बक्शा नहीं गया था और ना ही ऐसी कोई मूर्ति शेष रही थी ...
3 comments:
Monday, April 16, 2018

हर मन में हमने हिंसा को कूट-कूटकर भर दिया है

›
यह शोर , यह अफरा-तफरी मचाने का प्रयास , आखिर किस के लिये  है ? एक आम आदमी अपनी रोटी-रोजी कमाने में व्यस्त है , आम गृहिणी अपने घर को स...
5 comments:
Thursday, April 12, 2018

दे थप्पड़ और दे थप्पड़

›
राष्ट्रमण्डल खेलों का जुनून सर चढ़कर बोल रहा है और लिखने के लिये समय नहीं निकाल पा रही हूँ , लगता है बस खेलों की यह चाँदनी चार दिन की ...
4 comments:
Wednesday, April 4, 2018

द्वेष की आग कितना जलाएगी?

›
सोमनाथ का इतिहास पढ़ रही थी , सेनापति दौड़ रहा है , पड़ोसी राजा से सहायता लेने को तरस रहा है लेकिन सभी की शर्ते हैं। आखिर गजनी आता है औ...
2 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

अजित गुप्ता का कोना
View my complete profile
Powered by Blogger.