अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Saturday, March 31, 2018

माँ से मिलती है बुद्धिमत्ता

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बहुत दिनों की ब्रेक विद बिटिया के बाद आज लेपटॉप को हाथ लगाया है, कहाँ से शुरुआत करूं अभी सोच ही रही थी कि बिटिया ने पढ़ाये एक आलेख का ध्य...
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Friday, March 16, 2018

स्वार्थवाद का जेनेटिक परिवर्तन

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कल मुझे एक नयी बात पता चली, आधुनिक विज्ञान की बात है तो मेरे लिये नयी ही है। लेकिन इस विज्ञान की बात से मैंने सामाजिक ज्ञान को जोड़ कर दे...
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Sunday, March 11, 2018

अपनी रोटी से ही तृप्ति

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कभी मन हुआ करता था कि दुनिया की हर बात जाने लेकिन आज कुछ और जानने का मन नहीं करता! लगने लगा है कि यह जानना, देखना बहुत हो गया अब तो बहु...
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Thursday, March 8, 2018

गमले में सिमटी माँ बौन्जाई बनाती है, वटवृक्ष नहीं

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आपने कभी वटवृक्ष देखा है, कितना विशाल होता है! उसे जितनी धरती का आँचल मिलता है, वह उतना ही विशाल होता जाता है। लेकिन कुछ आधुनिक लोग आजकल ...
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Saturday, March 3, 2018

अपने जीवन को जीने का मौका दें

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"क्लब 60" यह फिल्म का नाम है, जो कल हमने टीवी पर देखी। जो लोग भी 60 की उम्र पार कर गये हैं उनके लिये अच्छी फिल्म है। इस फिल्म मे...
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Monday, February 26, 2018

मृत्यु संस्कार है – कौतुहल का विषय नहीं

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बहुत दिनों से मन की कलम चली नहीं , मन में चिंतन चलता रहा कि लेखन क्यों ? लेखन स्वयं की वेदना के लिये या दूसरों की वेदना को अपनी संवेदना ...
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Friday, February 9, 2018

कुछ नहीं होने का सुख

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जिन्दगी भर लगे रहे कि कुछ बन जाए , अपना भी नाम हो , सम्मान हो। लेकिन अब पूरी शिद्दत से मन कर रहा है कि हम कुछ नहीं है का सुख भोगें। जितन...
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