अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Monday, February 26, 2018

मृत्यु संस्कार है – कौतुहल का विषय नहीं

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बहुत दिनों से मन की कलम चली नहीं , मन में चिंतन चलता रहा कि लेखन क्यों ? लेखन स्वयं की वेदना के लिये या दूसरों की वेदना को अपनी संवेदना ...
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Friday, February 9, 2018

कुछ नहीं होने का सुख

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जिन्दगी भर लगे रहे कि कुछ बन जाए , अपना भी नाम हो , सम्मान हो। लेकिन अब पूरी शिद्दत से मन कर रहा है कि हम कुछ नहीं है का सुख भोगें। जितन...
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Monday, February 5, 2018

अकेली विदाई

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आप सभी को पता है कि मैं अभी अमेरिका जाकर आयी हूँ और कारण भी पता है कि पुत्रवधु को पुत्र हुआ था इसलिये जाना हुआ था। लेकिन जैसे ही अमेरिका क...
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Sunday, February 4, 2018

एकला चलो रे

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रवीन्द्र नाथ टैगोर ने हम सबको सिखा दिया कि – एकला चलो रे! हमें भी लगा कि बात तो ठीक है , दुनिया की किच-किच से अच्छा है एकला चलो रे। लेखन ...
Tuesday, January 30, 2018

#TED याने टेकनोलोजी, एन्टरटेंटमेंट और डिजाइन

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कल रिमोट को आगे-पीछे करते एक श्रेष्ठ कार्यक्रम पर आकर तलाश रूक गयी, देखा एक सम्भ्रान्त महिला अपने मन को दर्शकों के सामने अभिव्यक्त कर रही ...
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Saturday, January 27, 2018

यही अन्तर है पूरब और पश्चिम का

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कभी-कभी ऐसा भी होता है जब आपके पास कहने को या लिखने को कुछ होता है लेकिन आप लिख ही नहीं पाते हैं! बस यही सोचकर रह जाते हैं कि पहले नकारात्...
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Wednesday, January 24, 2018

अद्भुत रिटर्न पॉलिसी

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अभी अमेरिका में सर्दी का मौसम था, जबकि जून-जुलाई में भी हल्की सर्दी रहती ही है, लेकिन तब वहाँ कोई स्वेटर नहीं पहनता है। हम जैसे लोग स्वेटर...
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