अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Saturday, September 23, 2017

महिला की हँसी उसकी चूंदड़ जैसी

›
जब भी किसी महिला को खिलखिलाकर हँसते देखती हूँ तो मन करता है, बस उसे देखती ही रहूँ। बच्चे की पावन हँसी से भी ज्यादा आकर्षक लगती है मुझे किस...
5 comments:
Friday, September 22, 2017

झूठी शान से मुक्त होता पुरुष

›
कुछ लोग अलग मिट्टी से बने होते हैं, उनकी एक छोटी सी सोच उन्हें सबसे अलग बना देती है। कल केबीसी के सेट पर खिलाड़ी थी – अनुराधा,   लेकिन मैं...
6 comments:
Friday, September 15, 2017

ब्राह्मण की पोथी लुटी और बणिये का धन लुटा

›
हम बनिये-ब्राह्मण उस सुन्दर लड़की की तरह हैं जिसे हर घर अपनी दुल्हन बनाना चाहता है। पहले का जमाना याद कीजिए, सुन्दर राजकुमारियों के दरवा...
3 comments:
Monday, September 11, 2017

human values / nuisance values

›
#हिन्दी_ब्लागिंग विवेकानन्द के पास क्या था? उनके पास थे मानवीय मूल्य। इन्हीं मानवीय मूल्यों ( human vallues) के आधार पर उन्होंने दुनिया ...
8 comments:
Tuesday, September 5, 2017

एक विपरीत बात

›
#हिन्दी_ब्लागिंग मुझे आज तक समझ नहीं आया कि – a2 + b2 = 2ab इसका हमारे जीवन में क्या महत्व है? यह फार्मूला हमने रट लिया था, पता नहीं अब ठ...
6 comments:
Friday, September 1, 2017

बतंगड़ या समाधान

›
#हिन्दी_ब्लागिंग हम अपने-अपने सांचों में कैद हैं, हमारी सोच भी एक सांचे में बन्द है, उस सांचे को हम तोड़कर बाहर ही नहीं आना चाहते। कितना...
Thursday, August 24, 2017

अब महिला के पक्ष में वोट बैंक आएगा

›
#हिन्दी_ब्लागिंग एक प्रसंग जो कभी भूलता नहीं और बार-बार उदाहरण बनकर कलम की पकड़ में आ जाता है। मेरी मित्र #sushmakumawat ने कामकाजी महिलाओ...
2 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

अजित गुप्ता का कोना
View my complete profile
Powered by Blogger.