अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Thursday, August 24, 2017

अब महिला के पक्ष में वोट बैंक आएगा

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#हिन्दी_ब्लागिंग एक प्रसंग जो कभी भूलता नहीं और बार-बार उदाहरण बनकर कलम की पकड़ में आ जाता है। मेरी मित्र #sushmakumawat ने कामकाजी महिलाओ...
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Saturday, August 19, 2017

हमें अपनी झील के आकर्षण में बंधे रहना है

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#हिन्दी_ब्लागिंग मैं कहीं अटक गयी हूँ, मुझे जीवन का छोर दिखायी नहीं दे रहा है। मैं उस पेड़ को निहार रही हूँ जहाँ पक्षी आ रहे हैं, बसेरा  ...
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Wednesday, August 16, 2017

पहाड़ों के बीच बसा अलसीगढ़

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#हिन्दी_ब्लागिंग मनुष्य प्रकृति की गोद खोजता है, नन्हा शिशु भी माँ की गोद खोजता है। शिशु को माँ की गोद में जीवन मिलता है, उसे अमृत मिलता...
Tuesday, August 15, 2017

जीवन्त जीवन ही खिलखिलाता है

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#हिन्दा_ब्लागिंग आधा-आधा जीवन जीते हैं हम, आधे-आधे विकसित होते हैं हम और आधे-आधे व्यक्तित्व को लेकर जिन्दगी गुजारते हैं हम। खिलौने का एक...
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Wednesday, August 9, 2017

दिल इतना बड़ा कीजिये कि दुनिया समा जाये

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#हिन्दी_ब्लागिंग मन का दोगलापन देखिये, कभी मन कहता है कि अकेलापन चाहिये और कभी कहता है कि अकेलापन नहीं चाहिये। कभी कहता है कि अकेलापन तो ...
Sunday, August 6, 2017

तुम मेरे साथ हो बस यही मेरा है

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#हिन्दी_ब्लागिंग ओह! आज मित्रता दिवस है! मित्र याने मीत, अपने मन का गीत। मन रोज भर जाता है, उसे रीतना ही होता है,  लेकिन रीते कैसे? रीतने...
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Monday, July 31, 2017

तेरे लिये मैं क्या कर सकता हूँ?

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#हिन्दी_ब्लागिंग बादल गरज रहे हैं, बरस रहे हैं। नदियां उफन रही हैं, सृष्टि की प्यास बुझा रही हैं। वृक्ष बीज दे रहे हैं और धरती उन्हें अंकु...
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