अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Sunday, May 21, 2017

माँ को भी जीने का अधिकार दे दो

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इन दिनों सोशल मीडिया में माँ कुछ ज्यादा ही गुणगान पा रही है। हर ओर धूम मची है माँ के हाथ के खाने की। जैसै ही फेसबुक खोलते हैं, एक ना एक पो...
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Saturday, May 20, 2017

कितने घोड़ों को कुशल सवार मिलता है?

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जब में नौकरी में थी और मुझे विश्वविद्यालय की एक मीटिंग में फेकल्टी सदस्य के रूप में जाना था। मेरी वह पहली ही मीटिंग थी और फिर अंतिम भी हो ...
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Friday, May 19, 2017

#तीनतलाक – पुरुषों को पारिवारिक निर्णय से वंचित किया जाए

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आज अपनी बात कहती हूँ – जब मैं नौकरी कर रही थी तब नौकरी का समय ऐसा था कि खाना बनाने के लिये नौकर की आवश्यकता रहती ही थी। परिवार भी उन दिनों...
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Monday, May 15, 2017

पैसे से घर फूंकना

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मैंने अपने मोबाइल का प्लान बदलवा लिया है, पोस्टपेड से अब यह प्री-पेड़ हो गया है। 395 रू. में 70 दिन के लिये मेरे पास 2 जीबी डेटा प्रतिदिन ...
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Sunday, May 14, 2017

कस्तूरी मृग है - माँ

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कस्तूरी मृग का नाम सुना ही होगा आप सभी ने। कहते हैं कुछ  हिरणों की नाभि में कस्तूरी होती है और कस्तूरी की सुगंध अनोखी होती है। हिरण इस सुग...
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Friday, May 5, 2017

राग पैदा करो – वैराग्य आ जाएगा

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कल अपनी एक मित्र से फोन पर बात हो रही थी, वे बोली की दुनिया की इन्हीं  बातों के कारण मुझे वैराग्य हो गया है। पता नहीं क्यों यह शब्द मुझे क...
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Saturday, April 8, 2017

तू इसमें रहेगा और यह तुझ में रहेगा

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प्रेम में डूबे जोड़े हम सब की नजरों से गुजरे हैं, एक दूजे में खोये, किसी भी आहट से अनजान और किसी की दखल से बेहद दुखी। मुझे लगने लगा है कि ...
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