अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Saturday, April 8, 2017

तू इसमें रहेगा और यह तुझ में रहेगा

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प्रेम में डूबे जोड़े हम सब की नजरों से गुजरे हैं, एक दूजे में खोये, किसी भी आहट से अनजान और किसी की दखल से बेहद दुखी। मुझे लगने लगा है कि ...
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Tuesday, April 4, 2017

काश पैसा भी बासी होने लगे

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हमारी एक भाभी हैं, जब हम कॉलेज से आते थे तब वे हमारा इंतजार करती थीं और फिर हम साथ ही भोजन करते थे। उनकी एक खासियत है, बहुत मनुहार के साथ ...
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Monday, April 3, 2017

कोई शर्त होती नहीं प्यार में

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पूरब और पश्चिम फिल्म का एक गीत मुझे जीवन के हर क्षेत्र में याद आता  है – कोई शर्त होती नहीं प्यार में, मगर प्यार शर्तों पे तुमने किया .......
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Saturday, April 1, 2017

इस गर्मी को नमन

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और अंतत: आज एक तारीख को गर्मी ने एलान कर ही दिया कि मैं आ गयी हूँ। अब से अपने कामकाजी समय में परिवर्तन कर लो नहीं तो मेरी चपेट में आ सकते ...
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Tuesday, March 21, 2017

हमारी फरियाद है जमाने से

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कोई कहता है कि मुझसे मेरा बचपन छीन लिया गया कोई कहता है कि मुझसे मेरा यौवन छीन लिया गया लेकिन क्या कभी आपने सुना है कि किसी ने कहा हो कि म...
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Sunday, March 19, 2017

नरेन्द्र से विवेकानन्द की भूमि को नमन

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जिस धरती ने विवेकानन्द को जन्म दिया वह धरती तो सदैव वन्दनीय ही रहेगी। हम भी अब नरेन्द्र ( विवेकानन्द के संन्यास पूर्व का नाम) की भूमि को, ...
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Thursday, March 16, 2017

नदी के मुहानों पर बसा सुन्दरबन

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कोलकाता या वेस्ट-बंगाल के ट्यूरिज्म को खोजेंगे तो सर्वाधिक एजेंट सुन्दरबन के लिये ही मिलेंगे, हमारी खोज ने भी हमें सुन्दरबन के लिये आकर्षि...
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