अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Saturday, January 28, 2017

वे जड़े ढूंढ रहे हैं

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गणतंत्र दिवस अपनी उपादेयता बताकर चले गया, मेरे अंदर कई पात्र खलबली मचाने लगे हैं। देश के गण का तन्त्र और देश के मन की जड़े दोनों को खोद-ख...
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Sunday, January 22, 2017

ना नौलखा हार और ना ही बगीचा!

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ना नौलखा हार और ना ही बगीचा! नौलखा हार की कहानी तो सभी को पता है, कैसे एक माँ ने नकली हार के सहारे अपना बुढ़ापा काटा और उसकी  संतान इस...
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Friday, January 20, 2017

तेरे बिना मेरा नहीं सरता रे

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हमेशा कहानी से अपनी बात कहना सुगम रहता है। एक धनवान व्यक्ति था, वह अपने रिश्तेदारों और जरूरतमंदों की हमेशा मदद करता था। लेकिन वह अनुभव करत...
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Monday, December 19, 2016

कस्तूरी-सुगंध को हर दम महसूस करूंगी

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बहुत खो दिया मैंने, ऐसे सुख को, जिसमें अपार सृजन और कला का वास है। जिसमें प्रेम-प्यार-आत्मीयता को एक ही शब्द में समेटने का जन्मजात गुण ह...
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Friday, December 16, 2016

काहे को टेन्शन मौल लेना?

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कमाने से ज्यादा खर्च करने का संकट हैं। कभी सोचा है कि - आपने बहुत ज्ञान प्राप्त कर लिया, आप इसका उपयोग करना चाहते हैं लेकिन कैसे उपयोग क...
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Thursday, December 8, 2016

ज्यादा बाराती नहीं चलेंगे

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हमें आपकी लड़की पसन्द है, विवाह की तिथि निश्चित कीजिये, लेकिन एक शर्त है विवाह हमारे शहर में ही होगा। वर पक्ष का स्वर सुनाई देता  है। राम-...
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Wednesday, December 7, 2016

यौन कुण्ठा से उपजा वहशीपन

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जिस के फटी ना पैर बिवाई, वो क्या जाने पीर परायी। पुरुष-युवा मन की यौन कुण्ठा क्या है? भला मैं महिला होकर  कैसे जान सकती हूँ? क्या यह प्यास...
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