अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Wednesday, October 26, 2016

परशुराम को डिगा दे उसे मन की चाहतें कहते हैं।

›
मन को परत दर परत खोल दो, पता लगेगा कि न जाने कितनी ख्वाइशें यहाँ सोई पड़ी हैं, जिन ख्वाइशों को हम समझे थे कि ये हमारे मन का हिस्सा ही नहीं...
Saturday, October 8, 2016

शेष स्मृति चिह्न है नाभि

›
शेष स्मृति चिह्न है नाभि संतान के जन्म के साथ ही हम माँ से संतान को अलग करने के लिये नाभिनाल को काट देते हैं लेकिन नाभि का चिह्न हमें या...
4 comments:
Wednesday, September 28, 2016

चरित्र-नाशिनी इंजेक्शन

›
चरित्र-नाशिनी इंजेक्शन बरसों पहले एक कहानी पढ़ी थी, रोचक थी। पहाड़ी क्षेत्र में एक डॉक्टर रहता था, उसने एक इंजेक्शन ईजाद किया। जिसे एक ब...
2 comments:
Friday, September 23, 2016

शिकारी और शिकार

›
बंदरों पर एक वृत्त-चित्र का प्रसारण किया जा रहा था – ताकतवर नर बन्दर अपना मादा बन्दरों का हरम बनाकर रहता है और किसी अन्य युवा बन्दर को मादा...
2 comments:
Sunday, September 18, 2016

कितना गोपनीय जीवन बना लेते हैं कुछ लोग

›
अभी-अभी एक sms आया – 13 दिन शेष हैं, अपनी छिपी सम्पत्ती उजागर करने के लिये। अपनी जेब पर निगाह गयी, कहीं कुछ छिपा है क्या? यहाँ तो जिसे सम्प...
2 comments:
Saturday, September 17, 2016

आदत नवाबी की और सफर रेल का

›
अब वे सुबह 6 बजे से ही चाय वाले की बाट जोहने लगे कि चाय वाला साहब के लिये ट्रे सजाकर चाय लाएगा। मैं लगातार यात्रा और काम के कारण थकी हुई थी...
1 comment:
Saturday, September 3, 2016

श्मशान में पसरी गन्दगी – क्या यही मृत्यु संस्कार है?

›
शव को ले जाने का मार्ग कैसा हो, क्या यह हमारे लिये चिन्तनीय नहीं  होना चाहिए? जिस मार्ग पर नालियों का गन्दा पानी एकत्र हो, गन्दगी का ढेर लग...
2 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

अजित गुप्ता का कोना
View my complete profile
Powered by Blogger.