अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Wednesday, September 28, 2016

चरित्र-नाशिनी इंजेक्शन

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चरित्र-नाशिनी इंजेक्शन बरसों पहले एक कहानी पढ़ी थी, रोचक थी। पहाड़ी क्षेत्र में एक डॉक्टर रहता था, उसने एक इंजेक्शन ईजाद किया। जिसे एक ब...
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Friday, September 23, 2016

शिकारी और शिकार

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बंदरों पर एक वृत्त-चित्र का प्रसारण किया जा रहा था – ताकतवर नर बन्दर अपना मादा बन्दरों का हरम बनाकर रहता है और किसी अन्य युवा बन्दर को मादा...
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Sunday, September 18, 2016

कितना गोपनीय जीवन बना लेते हैं कुछ लोग

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अभी-अभी एक sms आया – 13 दिन शेष हैं, अपनी छिपी सम्पत्ती उजागर करने के लिये। अपनी जेब पर निगाह गयी, कहीं कुछ छिपा है क्या? यहाँ तो जिसे सम्प...
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Saturday, September 17, 2016

आदत नवाबी की और सफर रेल का

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अब वे सुबह 6 बजे से ही चाय वाले की बाट जोहने लगे कि चाय वाला साहब के लिये ट्रे सजाकर चाय लाएगा। मैं लगातार यात्रा और काम के कारण थकी हुई थी...
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Saturday, September 3, 2016

श्मशान में पसरी गन्दगी – क्या यही मृत्यु संस्कार है?

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शव को ले जाने का मार्ग कैसा हो, क्या यह हमारे लिये चिन्तनीय नहीं  होना चाहिए? जिस मार्ग पर नालियों का गन्दा पानी एकत्र हो, गन्दगी का ढेर लग...
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Wednesday, August 31, 2016

प्रेम की सूई दिखायी देती नहीं

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हर व्यक्ति के पास इतना ज्ञान आ गया है कि वह ज्ञान देने के लिये लोग ढूंढ रहा है, बस जैसे ही अपने लोग मिले कि ज्ञान की पोटली खुलने लगती है और...
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Wednesday, August 24, 2016

हम से अब पराया केक खाया नहीं जाएगा

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अपने गाँव-देहात में कभी रसोइये के हाथ में 500 रूपये धरती तो कभी मेहतरानी के हाथ में पचास रूपये धर कर खुश हो लेती और दान के भाव को बनाकर अपन...
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