अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Wednesday, August 31, 2016

प्रेम की सूई दिखायी देती नहीं

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हर व्यक्ति के पास इतना ज्ञान आ गया है कि वह ज्ञान देने के लिये लोग ढूंढ रहा है, बस जैसे ही अपने लोग मिले कि ज्ञान की पोटली खुलने लगती है और...
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Wednesday, August 24, 2016

हम से अब पराया केक खाया नहीं जाएगा

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अपने गाँव-देहात में कभी रसोइये के हाथ में 500 रूपये धरती तो कभी मेहतरानी के हाथ में पचास रूपये धर कर खुश हो लेती और दान के भाव को बनाकर अपन...
Tuesday, August 16, 2016

क्या सच में गाँव बदल रहे हैं?

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इन लड़कियों की अल्हड़ता क्या ऐसी ही बनी रहेगी? इन लड़कों का नृत्य क्या ऐसे ही देश प्रेम को सार्थक करता रहेगा? क्या इन नन्हें बच्चों में से ...
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Friday, August 5, 2016

उदयपुर का सौन्दर्य – उभयेश्वरजी के पर्वत

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इस प्रकृति की अनुपम देन को जितना देखो उतना ही अपनी ओर आकर्षित करती है लेकिन दिन तेजी से ढल रहा था और अब जंगल कह रहे थे कि हमें एकांत चाहिय...
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Friday, July 29, 2016

गुलाम बन रहे हैं हम

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आज दुनिया का अधिकांश व्यक्ति गुलामी का जीवन जी रहा है, वह किसी भी दिन सड़क पर आ सकता है। इसमें खुद को राजा समझने वाले लोग भी हैं और सामान्य...
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Sunday, July 24, 2016

मूर्ख दुनिया सड़ा आटा खाती है

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20 रूपये किलो का गैंहूं, सड़ने के बाद 2 रूपये किलो में मिल जाता है। अब इस सड़े गैंहूँ का मैदा आसानी से बन जाता है जो 30 रूपये किलो बिकता है...
Tuesday, July 19, 2016

मन तड़पत गुरु दर्शन को आज

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महिला का व्यक्तित्व भी कुछ ऐसा ही होता है। उसकी महिला पहचान इतनी बड़ी है कि उसे इससे अधिक की पहचान के लिये गुरु मिलना कठिन हो जाता है। कहीं...
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