अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Sunday, May 29, 2016

माइण्ड सेट

›
माइण्ड सेट पत्नी घर आज प्यारा बिटवा चला....... यह विदाई गीत बन जाये तो? नहीं पचा पाएंगे ना। हमें तो यही गीत सुनने की आदत है – पी के घ...
2 comments:
Wednesday, May 25, 2016

सपनों का अन्तर

›
एक तरफ मजदूर बालक खड़ा था तो दूसरी तरफ बार्बी डॉल लिये बालिका। लालन-पालन का अन्तर, सपनों का अन्तर, जमीनी सच्चाई का अन्तर सामने था। शायद गर...
Saturday, April 23, 2016

सेवा करने वाला सम्माननीय

›
सेवा करने वाला, कमाने वाले से किसी भी दृष्टि से कमतर नहीं होना चाहिये। इसलिये भक्त को भगवान से बड़ा मानते हैं। आप भी घर में जो आपकी सेवा क...
Monday, April 18, 2016

मेरे अंदर एक संसार है

›
मेरे अंदर एक पूरा संसार है। बचपन है, जवानी है और मेरा भविष्य है। मेरे अंदर मेरे माता-पिता है, भाई-बहन हैं, मेरे बच्चे हैं, पति है और म...
3 comments:
Saturday, April 9, 2016

जैसा निर्माण वैसा कर्म

›
सामाजिक कार्यों में जहाँ महिला कार्य की नितान्त आवश्यकता है वहाँ भी यदि प्रबुद्धता को स्थान ना मिले तो निराशा होती है। अपना आत्मसम्मान बनाय...
2 comments:
Monday, April 4, 2016

गप्प जिन्दाबाद

›
ढूंढिये खुद को, ढूंढिये अपने आनन्द को, निकाल दीजिये अपने गुबार। फिर देखिये दुनिया को देखने का नजरियां बदल जायेगा। जितनी गप्प मार सकते हैं ...
2 comments:
Wednesday, March 16, 2016

तेरा सूरज अलग और मेरा सूरज अलग

›
अब बिसर जाने दो – सम्मान का मोह, अब परे धकेल दो मेरेपन का भाव, अब मत सोचो किसी को संस्कार देने की बात। अब तो बस स्वयं में ही जीवन की तलाश क...
‹
›
Home
View web version

About Me

अजित गुप्ता का कोना
View my complete profile
Powered by Blogger.