अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Monday, March 30, 2015

बाहर के दायरों से घर तक

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घर की दुनिया कितनी अपनी सी है। घर का कोना-कोना आपका होता है, दीवारें लगता है जैसे आपको बाहों में लेने के लिए आतुर हों। इस अपने घर में पूर्ण...
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Monday, March 23, 2015

कल तक थे चार पुरुषार्थ लेकिन अब हैं पाँच

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श्रीराम और श्रीकृष्‍ण का जीवन देखिए, उनके जीवन का कृतित्‍व समझिए। उन्‍होंने राष्‍ट्र-सुरक्षा को ही सर्वोपरी माना और आततायियों का संहार ही उ...
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Sunday, March 15, 2015

मन की किवड़िया खोल

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मन की किवड़िया खोल - आलेख को पूरा पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें -  http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80...
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Friday, March 13, 2015

मेरे शहर में -------

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हर रोज ऐसी सुबह हो - अठखेलियां करता झील का किनारा हो, पगडण्‍डी पर गुजरते हुए हम हो, पक्षियों का कलरव हो, सूरज मंद-मंद मुस्‍कराता हुआ पहाड़ों...
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Sunday, November 9, 2014

63वें जन्‍मदिन पर - अपने मन की बात

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63 बार मैं कार्तिक/नवम्‍बर के मास से गुजर चुकी हूँ। कितना कुछ बदल गया है, ना अब वह पथ है और ना ही वह पथिक है। जिन तंग गलियों में पहली बार आ...
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Monday, November 3, 2014

अमेरिका को कैसे अपनाएं? भाग 2

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अब आते हैं अपने दिन और रात पर। केलिफोर्निया के सेनोजे शहर में सुबह जल्‍दी ही हो जाती थी। भारत में जून महिना भरपूर गर्मी भरा रहता है लेकिन य...
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Tuesday, October 28, 2014

अमेरिका को कैसे अपनाएं?

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आपने किसी से प्रेम किया था? या आपके मन में आपके जीवनसाथी की एक विशिष्‍ट कल्‍पना थी? इसके विपरीत आपका प्रेम या आपकी कल्‍पना साकार रूप ना ले ...
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