अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Sunday, November 9, 2014

63वें जन्‍मदिन पर - अपने मन की बात

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63 बार मैं कार्तिक/नवम्‍बर के मास से गुजर चुकी हूँ। कितना कुछ बदल गया है, ना अब वह पथ है और ना ही वह पथिक है। जिन तंग गलियों में पहली बार आ...
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Monday, November 3, 2014

अमेरिका को कैसे अपनाएं? भाग 2

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अब आते हैं अपने दिन और रात पर। केलिफोर्निया के सेनोजे शहर में सुबह जल्‍दी ही हो जाती थी। भारत में जून महिना भरपूर गर्मी भरा रहता है लेकिन य...
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Tuesday, October 28, 2014

अमेरिका को कैसे अपनाएं?

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आपने किसी से प्रेम किया था? या आपके मन में आपके जीवनसाथी की एक विशिष्‍ट कल्‍पना थी? इसके विपरीत आपका प्रेम या आपकी कल्‍पना साकार रूप ना ले ...
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Thursday, September 11, 2014

अमेरिका में भारतीयों का खानपान

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भारत के प्रत्‍येक शहर में एक ऐसा चौक या गली जरूर होगी जहाँ चाट खाते हुए लोग मिल जाएंगे। अभी तो प्‍लेटों का जमाना आ गया है लेकिन अभी कुछ दिन...
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Saturday, August 30, 2014

अमेरिका के बाजार : ग्राहक जाए बारबार

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अमेरिका में शॉपिंग का अपना ही मजा है, आप 8 बाय 10 की दुकान से निकलकर सीधे ही आकाश के तारामण्‍डल में पहुँच जाते हैं। चारों तरफ एक से बढ़कर एक...
Saturday, August 9, 2014

कुछ प्‍यार दे आए और कुछ प्‍यार ले आए

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हम बगीचा भूल गए, बगीचे के फूल भूल गए, फूलों की सुगंध भूल गए, बस स्‍मरण रहा कि मकरंद कैसे बनता है। हम सभी इसी मकरंद की तलाश में लगे रहे, कुछ...
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Thursday, June 19, 2014

ज्रीरो जीव रो बेरी रे तू मत खाय परण्‍यो जीरो

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जीरो जीव रो बेरी रे तू मत खाये परणा जीरो , यह कहावत बचपन से आज तक सुनते आए हैं, लेकिन जीरे से इतना परहेज रखने को क्‍यों कहा गया समझ नहीं आ...
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