अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Thursday, June 19, 2014

ज्रीरो जीव रो बेरी रे तू मत खाय परण्‍यो जीरो

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जीरो जीव रो बेरी रे तू मत खाये परणा जीरो , यह कहावत बचपन से आज तक सुनते आए हैं, लेकिन जीरे से इतना परहेज रखने को क्‍यों कहा गया समझ नहीं आ...
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Tuesday, March 18, 2014

कहीं हम भी स‍ठिया तो नहीं रहे हैं?

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आप लोग न जाने किस किस से डरते होंगे लेकिन मुझे तो अब स्‍वयं से ही डर लगने लगा है। हँसिये मत और ना ही आश्‍चर्य प्रकट कीजिए, बड़े-बूढ़ों ने कहा...
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Tuesday, March 11, 2014

अण्‍डमान का सुन्‍दर द्वीप हेवलोक

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एक और दर्शनीय और पर्यटकीय महत्‍व का द्वीप है – हेवलोक। प्रत्‍येक पर्यटक की मंजिल होती है हेवलोक। यहाँ समुद्र तट नाम के साथ नम्‍बरों में भी ...
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Monday, March 3, 2014

हनुमान द्वीप से अण्‍डमान द्वीप - प्रकृति का अद्भुत खजाना

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अंग्रजों के क्रूर अत्‍याचार को दर्शाता सेलुलर जेल वीर सावरकर सदृश्‍य हजारों स्‍वातंत्र्य वीरों की तपस्‍थली - अण्‍डमान निकोबार की सेलुलर ज...
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Friday, February 7, 2014

क्‍या यहाँ तुम्‍हारी नाल गड़ी है?

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या वाकयी में जहाँ नाल गड़ी होती है, उस जगह का आकर्षण हमेशा बना रहता है? अपना शहर, जहाँ हमने जीवन प्राप्‍त किया हो, वह हमेशा क्‍यों अपना सा ल...
Friday, January 17, 2014

पिछोला झील में नाव उतारी - अब कचरा नहीं बचेगा

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पिछोला झील में नाव उतारी - अब कचरा नहीं बचेगा रात को कुछ मनचले भी यहाँ चले आते हैं, मदहोश होने का इंतजाम भी साथ लाते हैं और मदहोशी में भूल...
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Thursday, January 2, 2014

कोहरा छाया है, सूरज भैया रजाई में हैं

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बस हम जैसे खिटपिटये रजाई से निकल गए हैं और अपने शब्‍दों को जाँचने में लगे हैं कि वे जमे तो नहीं हैं। खिड़की से कोहरे का आनन्‍द लेते हुए शब्‍...
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