अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Friday, February 7, 2014

क्‍या यहाँ तुम्‍हारी नाल गड़ी है?

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या वाकयी में जहाँ नाल गड़ी होती है, उस जगह का आकर्षण हमेशा बना रहता है? अपना शहर, जहाँ हमने जीवन प्राप्‍त किया हो, वह हमेशा क्‍यों अपना सा ल...
Friday, January 17, 2014

पिछोला झील में नाव उतारी - अब कचरा नहीं बचेगा

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पिछोला झील में नाव उतारी - अब कचरा नहीं बचेगा रात को कुछ मनचले भी यहाँ चले आते हैं, मदहोश होने का इंतजाम भी साथ लाते हैं और मदहोशी में भूल...
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Thursday, January 2, 2014

कोहरा छाया है, सूरज भैया रजाई में हैं

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बस हम जैसे खिटपिटये रजाई से निकल गए हैं और अपने शब्‍दों को जाँचने में लगे हैं कि वे जमे तो नहीं हैं। खिड़की से कोहरे का आनन्‍द लेते हुए शब्‍...
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Tuesday, December 17, 2013

आ गया है नया ठेकेदार - अपने-अपने काम करालो

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लोकतंत्र के चुनावी दंगल का एक चरण पूरा हुआ। राजस्‍थान में ठेका बदल गया और नया ठेकेदार आ गया। अब पाँच साल सारे ही काम नए ठेकेदार की मंशा से ...
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Saturday, November 30, 2013

सम्‍मान – प्रेम को नष्‍ट और द्वेष को आकृष्‍ट करता है

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इन दिनों अन्‍य शहरों में आवागमन बना रहा, इसकारण दिमाग के विचारों का आवागमन बाधित हो गया। नए-पुराने लोगों से मिलना और उनकी समस्‍याएं, उनकी ख...
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Sunday, November 17, 2013

चुनाव का दंगल लेकर आए हैं - बने रहिए हमारे साथ

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चुनाव का दंगल लेकर आए हैं - बने रहिए हमारे साथ चुनावी दंगल चल रहे हैं, सारे ही पहलवान ताल ठोककर मैदान में हैं। मीडिया बारी बारी से सभी...
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Friday, November 15, 2013

चुनाव का दंगल लेकर आए हैं - बने रहिए हमारे साथ

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चुनावी दंगल चल रहे हैं, सारे ही पहलवान ताल ठोककर मैदान में हैं। मीडिया बारी बारी से सभी को उकसाने का श्रम कर रहा है। जैसे ही कोई पहलवान कमज...
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