अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Tuesday, December 17, 2013

आ गया है नया ठेकेदार - अपने-अपने काम करालो

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लोकतंत्र के चुनावी दंगल का एक चरण पूरा हुआ। राजस्‍थान में ठेका बदल गया और नया ठेकेदार आ गया। अब पाँच साल सारे ही काम नए ठेकेदार की मंशा से ...
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Saturday, November 30, 2013

सम्‍मान – प्रेम को नष्‍ट और द्वेष को आकृष्‍ट करता है

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इन दिनों अन्‍य शहरों में आवागमन बना रहा, इसकारण दिमाग के विचारों का आवागमन बाधित हो गया। नए-पुराने लोगों से मिलना और उनकी समस्‍याएं, उनकी ख...
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Sunday, November 17, 2013

चुनाव का दंगल लेकर आए हैं - बने रहिए हमारे साथ

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चुनाव का दंगल लेकर आए हैं - बने रहिए हमारे साथ चुनावी दंगल चल रहे हैं, सारे ही पहलवान ताल ठोककर मैदान में हैं। मीडिया बारी बारी से सभी...
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Friday, November 15, 2013

चुनाव का दंगल लेकर आए हैं - बने रहिए हमारे साथ

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चुनावी दंगल चल रहे हैं, सारे ही पहलवान ताल ठोककर मैदान में हैं। मीडिया बारी बारी से सभी को उकसाने का श्रम कर रहा है। जैसे ही कोई पहलवान कमज...
Friday, November 8, 2013

हम और आप सभी किसी न किसी क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं

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हमारे यहाँ तो अध्‍यात्‍म का मूल ही है कि स्‍वयं को खोजो। और यह स्‍वयं की खोज बचपन से ही प्रारम्‍भ हो जानी चाहिए। जब हम अपनी योग्‍यताओं को ख...
Thursday, October 31, 2013

कहां गयी वो गरमा-गरम बहसें?

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कहां गयी वो गरमा-गरम बहसें? कभी नारीवाद के नाम पर, कभी राष्‍ट्रवाद के नाम पर, कभी सत्ता की नजदीकियों के कारण, कभी अन्‍ना हजारे और रामदेव...
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Wednesday, October 23, 2013

पृथकता और सत्ता की चाहत

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प्रत्‍येक व्‍यक्ति पृथक होकर स्‍वतंत्र होना चाहता है क्‍यों? शायद वह स्‍वयं की सत्ता चाहता है। किसी का प्रतिबंध नहीं, किसी का अनुशासन नहीं,...
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