अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Tuesday, September 17, 2013

कविता - बचपन के पन्ने मेरे हाथों में

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बचपन के पन्ने मेरे हाथों में इस कविता को सम्‍पूर्ण पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें - http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%95%E0%A4%B...
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Tuesday, September 10, 2013

कुछ गर्द उड़ी कुछ सीलन थी

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 जिन अध्‍यायों को मन बिसरा बैठा था, वे एक-एक कर निकल आए। कहीं गर्द थी और कही सीलन थी। कहीं प्रकाश था तो कहीं उल्‍लास भी था। लेकिन अब रेत हा...
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Friday, September 6, 2013

छोटे कस्‍बे का बड़ा संघर्ष - श्रीमती संतोष अरोड़ा

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छोटे कस्‍बे का बड़ा संघर्ष - श्रीमती संतोष अरोड़ा पांस्‍ट पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें -  http://sahityakar.com/wordpress/
Wednesday, August 28, 2013

बिना अभिव्‍यक्ति, व्‍यक्ति बौना

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 मन  मन की संतुष्टि के लिए अभिव्‍यक्ति आवश्‍यक है। समाज में सौहार्द के लिए मन की संतुष्टि आवश्‍यक है। अभी भी देर नहीं हुई है, बस टटोलिए अपन...
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Tuesday, August 20, 2013

प्रेम का अभाव और असभ्‍यता का उदय

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प्रेम का अभाव और असभ्‍यता का उदय पोस्‍ट को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें -  http://sahityakar.com/wordpress/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%...
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Wednesday, August 7, 2013

मृत्‍यु का सैलाब और अपनों के हाथ में तराजू

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भाई नहीं रहा ! यह सूचना है या फिर काल जलधि की हलचल। मन के अनन्‍त में एक लहर सी उठती है, एक शून्‍य बन जाता है। मन का एक कोना टूटकर बिखर जाता...
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Wednesday, July 31, 2013

कलाकार और सम्‍मान

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यदि आज ये कलाकार नहीं होते तो हमारा जीवन कैसा होता? हम प्रकृति के समक्ष खड़े होते, निहत्‍थे बनकर। लेकिन मनुष्‍य ने प्रकृति को संवार दिया, ...
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