अजित गुप्‍ता का कोना

श्रीमती अजित गुप्‍ता प्रकाशित पुस्‍तकें - शब्‍द जो मकरंद बने, सांझ की झंकार (कविता संग्रह), अहम् से वयम् तक (निबन्‍ध संग्रह) सैलाबी तटबन्‍ध (उपन्‍यास), अरण्‍य में सूरज (उपन्‍यास) हम गुलेलची (व्‍यंग्‍य संग्रह), बौर तो आए (निबन्‍ध संग्रह), सोने का पिंजर---अमेरिका और मैं (संस्‍मरणात्‍मक यात्रा वृतान्‍त), प्रेम का पाठ (लघु कथा संग्रह) आदि।

Friday, April 27, 2012

हम अक्‍सर “यूज” होते हैं

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हम अक्‍सर “यूज” होते हैं  आलेख पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं - www.sahityakar.com
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Thursday, March 29, 2012

रिश्‍तों में एक खुशबू होती है, बस उसे मुठ्ठी में भरने की जरूरत है

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रिश्‍तों में एक खुशबू होती है, बस उसे मुठ्ठी में भरने की जरूरत है  इस पोस्‍ट को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें - www.sahityakar.com
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Friday, March 9, 2012

कविता के नाम पर फूहड़बाजी को कब तक बर्दास्‍त करें?

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कविता के नाम पर फूहड़बाजी को कब तक बर्दास्‍त करें? कृपया इस लिंक‍ पर पोस्‍ट को पढें और अपना परामर्श दें - www.sahityakar.com 
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Tuesday, February 21, 2012

रेलवे, सीनियर सि‍टीजन के लिए लोअर-बर्थ आवश्‍यक करे

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भारतीय रेल, दुनिया की सबसे विशाल परियोजना है। लाखों यात्री प्रतिदिन एक शहर से दूसरे शहर और छोटे-छोटे गाँवों तक रेल के द्वारा ही यात्रा करते...
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Tuesday, January 31, 2012

एक आवश्‍यक परिवर्तन, शायद यही समय की मांग है।

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कल मेरा याहू अकाउण्‍ट हैक हो गया परिणाम स्‍वरूप मेरे सारे ही कांटेक्‍टस समाप्‍त हो गए। यह तो किसी हैकर का कमाल था लेकिन हमारी सरकार द्वारा...
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Wednesday, January 18, 2012

अतीत हमें वर्तमान में जीने नहीं देता

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जिस किसी भी व्‍यक्ति के पास या देश के पास अपना अतीत नहीं होता वह वर्तमान में ही जीता है और भविष्‍य की कल्‍पना करता है लेकिन जिसके पास अतीत...
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Thursday, December 29, 2011

तो विदा 2011, क्‍या करें तुझे सर्दी में ही विदा करना पड़ रहा है!

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बहुत दिनों से कोई पोस्‍ट नहीं लिखी गयी और इस साल ने भी अपने बोरिये-बिस्‍तर बाँध लिए। सोचा कि जाते-जाते साल में उसकी पेटी में एक कागज अपना ...
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